25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केंद्र को न्यायमूर्ति अराधे और न्यायमूर्ति पंचोली को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश पद पर पदोन्नत करने की सिफारिश भेजी थी, जिससे न्यायपालिका की कार्यक्षमता और संतुलन को और मज़बूती मिले।
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न्यायमूर्ति नागरत्ना की आपत्ति, मुख्य न्यायाधीश ने नए जज दिलाए शपथ सुप्रीम कोर्ट में संख्या 34
25 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने केंद्र सरकार को न्यायमूर्ति अराधे और न्यायमूर्ति पंचोली को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश पद पर पदोन्नत करने की सिफारिश की थी। हालांकि, कॉलेजियम की सदस्य और सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने न्यायमूर्ति पंचोली की नियुक्ति का कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यह न्यायपालिका के लिए प्रतिकूल साबित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट की एकमात्र महिला न्यायाधीश नागरत्ना ने इस मुद्दे समेत कई पहलुओं पर असहमति दर्ज की। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस नियुक्ति को आगे बढ़ाया गया तो कॉलेजियम प्रणाली की शेष विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो सकती है।
न्यायमूर्ति अराधे का न्यायिक कार्यकाल और नियुक्तियाँ
13 अप्रैल, 1964 को जन्मे न्यायमूर्ति अराधे 12 जुलाई, 1988 को अधिवक्ता के रूप में नामांकित किया गया। उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में दीवानी एवं संवैधानिक, मध्यस्थता और कंपनी मामलों में वकालत की। अप्रैल 2007 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नियुक्त किया गया। न्यायमूर्ति अराधे को 29 दिसंबर, 2009 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश और 15 फरवरी, 2011 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उन्हें जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया और 20 सितंबर, 2016 को उन्होंने शपथ ली।


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