लद्दाख हिंसा को लेकर सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर आरोप लगाए हैं, जबकि उनका कहना है कि उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है। तो आखिर लद्दाख में इस समय क्या स्थिति है, आइए समझते हैं
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद लद्दाख में छठी अनुसूची और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन भड़क उठा
अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर राज्य का पुनर्गठन किया गया। इसके तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बने। जम्मू-कश्मीर को विधानसभा मिली, जबकि लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में नई विधानसभा का गठन हो चुका है, लेकिन लद्दाख में लगातार मांग उठ रही है कि उसे छठी अनुसूची में शामिल किया जाए और पूर्ण राज्य का दर्जा मिले। इन्हीं मांगों को लेकर चल रहे ताज़ा आंदोलन के दौरान हिंसा भड़क गई।
छठी अनुसूची व राज्य के दर्जे की मांग पर शुरू हुआ धरना लेह बंद और हिंसक टकराव में बदला
लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग पर सोनम वांगचुक ने 35 दिन का धरना शुरू करने का ऐलान किया था। 10 सितंबर से वे और लद्दाख एपेक्स बॉडी (एलएबी) के 15 कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर बैठे थे। मंगलवार को एलएबी के दो कार्यकर्ताओं की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद बुधवार को लेह बंद बुलाया गया। बंद के दौरान बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरे और मार्च निकाला। इसी बीच उन्होंने भाजपा और हिल काउंसिल मुख्यालय में घुसने की कोशिश की, जिस पर पुलिस और सुरक्षाबलों ने कार्रवाई की। हालात तेजी से बिगड़े और पथराव शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय भाजपा दफ्तर में आग भी लगा दी।
