पिछले लगभग पांच महीनों से अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है, और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस पर सहमति बन सकती है। इससे आयात शुल्क को लेकर चल रहा विवाद सुलझ सकता है, और ट्रंप सरकार भारत पर लगाए गए बढ़े हुए टैरिफ को वापस ले सकती है। लेकिन इस बीच ट्रंप की रूस को लेकर दी गई नई धमकी ने इस टैरिफ विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। अगर ट्रंप रूस पर कड़े टैरिफ लगाते हैं, तो इसका अप्रत्यक्ष असर भारत पर भी पड़ सकता है।
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रूस से व्यापार करने वाले देशों पर गिरेगा अमेरिकी टैरिफ का असर
अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी है कि अगर रूस और यूक्रेन का युद्ध नहीं रुका, तो वह रूस पर सख्त टैरिफ लगाएंगे, जिसे उन्होंने ‘सेकेंडरी टैरिफ’ कहा है। इसका मतलब है कि यह शुल्क सीधे रूस पर नहीं, बल्कि उन देशों पर लगाया जाएगा जो रूस से व्यापार कर रहे हैंऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका इस कदम के जरिए रूस के व्यापारिक नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की कोशिश कर रहा है। पहले ही अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। अब अमेरिका उन देशों को भी निशाने पर लेने की तैयारी में है, जो पारंपरिक रूप से रूस के करीबी रहे हैं और उसके साथ व्यापार कर रहे हैं। इनमें भारत, चीन, ब्राजील, तुर्किये, वियतनाम और यूएई जैसे देश शामिल हैं।
भारत-रूस रक्षा संबंधों में गिरावट के बावजूद गहराई बरकरार
भारत और रूस लंबे समय से रक्षा और हथियारों के क्षेत्र में करीबी साझेदार रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में यह सहयोग कुछ कमजोर हुआ है। 2010-14 में भारत की 72% रक्षा खरीद रूस से होती थी, जो 2020-24 में घटकर 36% रह गई। इसकी वजह फ्रांस, इस्राइल और अमेरिका से आयात बढ़ना और रूस की युद्ध में व्यस्तता है। इसके बावजूद, 2023 तक भारत ने बीते 20 वर्षों में 60 अरब डॉलर के रक्षा सौदों में से करीब 65% यानी 40 अरब डॉलर के हथियार रूस से ही खरीदे। भारत की तीनों सेनाएं अब भी रूसी हथियारों पर काफी निर्भर हैं।


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