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मंगल मिशन : इंजेन्‍वनिटी मार्स हेलीकॉप्‍टर की पहली कंट्रोल फ्लाइट के लिए तैयार

मंगल पर सफलता की नई कहानी

नासा मंगल मिशन पर भेजे गए परसिवरेंस में लगे इंजेन्‍वनिटी मार्स हेलीकॉप्‍टर की पहली कंट्रोल फ्लाइट के लिए खुद को तैयार कर रहा है। इस तरह से ये पहला मौका होगा जब कोई हेलीकॉप्‍टर मंगल की सतह से उड़ेगा और उसका नजारा कैमरे में कैद करेगा।

इसके लिए 8 अप्रैल 2021 का दिन तय है। 2 किग्रा से भी कम वजनी ये इंजेन्‍वनिटी हेलीकॉप्‍टर बेहद कमाल का है। आपको बता दें कि नासा इस मिशन के दौरान पहले ही काफी कुछ कमाल दिखा चुका है। नासा की इस मिशन की टीम ने कई मील के पत्थर इस दौरान स्‍थापित किए हैं।

नासा का ये रोवर फिलहाल उसी जगह पर है जहां इंजेन्‍वनिटी को अपनी एतिहासिक उड़ान भरनी है। नासा के प्‍लानेटरी साइंस डिवीजन के डायरेक्‍टर लॉरी ग्‍लेज का कहना है कि 1997 में नासा के सोजर्नर रोवर ने पहली बार इस ग्रह की सतह को छुआ था। उस वक्‍त ये बात साबित हो गई थी कि इस लाल ग्रह पर चलना मुमकिन है।

इस मिशन ने भावी मिशन को एक नई सोच और आयाम दिया था। यही सोच इसके बाद मंगल पर भेजे गए सभी मिशन पर लागू हुई थी। उनका कहना है कि इंजेन्‍वनिटी वैज्ञानिक काफी कुछ जानना चाहते हैं। यदि अपने काम में इंजेन्‍वनिटी सफल होता है तो इसको और आगे तक बढ़ाया जाएगा। इस तरह से ये भविष्‍य में मंगल पर होने वाली खोज में अहम भूमिका भी अदा कर सकेगा।

Ingenuity हेलीकॉप्‍टर की उड़ान

जहां तक इंजेन्‍वनिटी हेलॉकॉप्‍टर की बात है तो आपको बता दें कि ये फिलहाल परसिवरेंस रोवर के साथ ही अटैच है। पिछले दिनों इस रोवर ने मार्स की सतह पर चहलकदमी की थी जिसका एक वीडियो भी नासा ने जारी किया था।

इस वीडियो में इसकी आवाज भी सुनाई दे रही थी और इसकी वजह से मार्स की सतह पर बने निशान भी साफ देखे जा सकते थे। ये रोवर 18 फरवरी को मार्स पर सफलतापूर्वक उतरा था।

आपको बता दें कि नासा पर कंट्रोल तरीके से उड़ान भरना काफी मुश्किल काम है। नासा के मुताबिक ये धरती पर उड़ान भरने से कहीं अधिक मुश्किल है। मंगल ग्रह पर धरती के मुकाबले केवल एक तिहाई ग्रेविटी है। वहीं उसका वातावरण धरती के मुकाबले केवल एक फीसदी ही घना है। वहां पर धरती के मुकाबले सूरज की आधी ही रोशनी पहुंच पाती है।

वहीं मंगल पर रात का तापमान 130 डिग्री तक नीचे गिर जाता है। ये तापमान किसी भी चीज को जमा सकता है और इलेक्ट्रिकल उपकरणों या कलपुर्जों को तोड़ सकता है। इंजेन्‍वनिटी को परसिवरेंस में जगह को देखते हुए ही तैयार किया गया है। इसलिए ही इसको साइज में छोटा रखा गया है।

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