आज एंड्रॉयड फोन में हेल्थ रिकॉर्ड से लेकर बैंकिंग डिटेल तक बेहद संवेदनशील जानकारी स्टोर रहती है। ऐसे में न सिर्फ कंपनियां बल्कि हैकर्स भी इस डेटा पर नजर रखते हैं। एक रिसर्च के मुताबिक करीब 70 प्रतिशत ऐप्स यूजर्स का संवेदनशील डेटा एक्सेस करती हैं, जबकि 60 प्रतिशत ऐप्स कैमरा, लोकेशन और माइक्रोफोन की अनुमति मांगती हैं। इसलिए अब यूजर्स को खुद अपने डेटा की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की जरूरत है।
नोटिफिकेशन एक्सेस करें कंट्रोल
फोन पर आने वाले नोटिफिकेशन अक्सर स्मार्टवॉच और दूसरे डिवाइसेस पर भी दिखाई देते हैं। इनमें मैसेज, ईमेल, बैंकिंग और सोशल मीडिया अलर्ट जैसी निजी जानकारी शामिल होती है। यूजर्स को चाहिए कि वे उन ऐप्स की नोटिफिकेशन एक्सेस तुरंत बंद करें, जिनका रोजाना इस्तेमाल नहीं करते।
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एडवरटाइजिंग आईडी करें डिलीट
गूगल हर डिवाइस को एक यूनिक एडवरटाइजिंग आईडी देती है, जिससे ऐप्स यूजर एक्टिविटी के आधार पर विज्ञापन दिखाती हैं। यूजर्स सेटिंग्स में जाकर इस आईडी को डिलीट कर सकते हैं। इससे विज्ञापन पूरी तरह बंद नहीं होंगे, लेकिन एडवरटाइजर्स के लिए आपकी प्रोफाइल ट्रैक करना मुश्किल हो जाएगा।
यूजेज और डायग्नोस्टिक डेटा शेयरिंग बंद करें
एंड्रॉयड डिवाइस गूगल के साथ यूजेज और डायग्नोस्टिक डेटा शेयर करने का विकल्प देता है, जो परफॉर्मेंस सुधारने के लिए इस्तेमाल होता है। कई फोन में यह विकल्प पहले से ऑन रहता है। यूजर्स सेटिंग्स में जाकर इसे बंद कर सकते हैं और अतिरिक्त डेटा शेयरिंग रोक सकते हैं।
ऐप परमिशन को नियमित रूप से करें रिव्यू
कई ऐप्स जरूरत से ज्यादा परमिशन मांगती हैं और यूजर डेटा डेवलपर्स तक पहुंचा देती हैं। यूजर्स को हर ऐप की परमिशन ध्यान से चेक करनी चाहिए और केवल वही अनुमति देनी चाहिए, जो ऐप की कार्यप्रणाली के लिए जरूरी हो। सेटिंग्स में जाकर समय-समय पर परमिशन रिव्यू करना डेटा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
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