एएसआई 2023-24 रिपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश अब “बीमारू राज्य” की छवि से निकलकर भारत के औद्योगिक विकास का इंजन बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। योगी सरकार की नीतियों ने प्रदेश को एक ऐसा वातावरण दिया है जिसमें रोजगार, निवेश, और उत्पादन, तीनों मोर्चों पर स्थायी और सतत प्रगति सुनिश्चित हो रही है।
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एएसआई : रोजगार पैदा करने में बड़ी छलांग
एएसआई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार में 5.92% की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले एक दशक (2014-15 से 2023-24) के दौरान राज्य में 57 लाख से अधिक नौकरियों का सृजन हुआ। रोजगार में उत्तर प्रदेश अब तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों के साथ शीर्ष 5 में शामिल है। देश भर में औद्योगिक रोजगार में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 8% तक पहुंच चुकी है, जो इस क्षेत्र में राज्य की मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है।
वार्षिक औद्योगिक सर्वेक्षण (एएसआई) 2023-24 के ताज़ा आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की औद्योगिक नीतियां उत्तर प्रदेश को तेजी से भारत के औद्योगिक मानचित्र पर एक प्रमुख राज्य के रूप में स्थापित कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश रोज़गार सृजन, फैक्ट्री इकाइयों की संख्या, उत्पादन और सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) जैसे कई महत्वपूर्ण पैमानों पर देश के शीर्ष 5 औद्योगिक राज्यों में शामिल हो गया है।
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उत्पादन और जीवीए में रिकॉर्ड वृद्धि
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2023-24 में औद्योगिक उत्पादन में 5.80% की वृद्धि दर्ज की गई। सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में 11.89% की बढ़त देखने को मिली, जिसमें उत्तर प्रदेश की 7% भागीदारी रही। बेसिक मेटल्स, मोटर वाहन, केमिकल्स, फूड प्रोडक्ट्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में प्रदेश की भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही है। योगी सरकार की औद्योगिक नीतियों का ठोस असर | रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि योगी सरकार की नीतियां सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं | बल्कि उनका असर अब जमीनी स्तर पर नजर आने लगा है। डिफेंस कॉरिडोर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में किए गए बड़े निवेशों ने यूपी को नए औद्योगिक युग की ओर अग्रसर किया है।

