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    मिडिल

    मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध जैसे हालात के बीच एक नई साइबर रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। साइबर सिक्योरिटी एजेंसी Check Point Research की ताज़ा स्टडी बताती है कि हैकर्स अब इंटरनेट से जुड़े CCTV और IP कैमरों को बड़े पैमाने पर टार्गेट कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, Iran से जुड़े साइबर एक्टर्स ने मिडिल ईस्ट के कई देशों में इंटरनेट से जुड़े कैमरों को स्कैन करना और उनमें सेंध लगाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन कैमरों को हैक करने का मकसद सिर्फ जासूसी नहीं है, बल्कि इन्हें सैन्य ऑपरेशन्स में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

    रिसर्चर्स के मुताबिक हैक किए गए कैमरों के जरिए हमलावर मिसाइल हमलों से पहले इलाके की निगरानी कर सकते हैं और हमले के बाद हुए नुकसान का आकलन भी कर सकते हैं। सैन्य भाषा में इसे Battle Damage Assessment (BDA) कहा जाता है। यानी अब जंग सिर्फ मिसाइल, ड्रोन और सैनिकों से नहीं, बल्कि आम नागरिकों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी के जरिए भी लड़ी जा रही है।

    CCTV हैकिंग से कैसे मिलती है जंग में मदद

    मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि Israel ने Tehran में सैकड़ों CCTV कैमरों को हैक कर इलाके की निगरानी की थी। बताया जाता है कि यह गतिविधि Ali Khamenei के कंपाउंड पर बमबारी से पहले की गई थी, ताकि लोकेशन और आसपास की गतिविधियों का सटीक अंदाजा लगाया जा सके।

    रिपोर्ट के अनुसार, यह साइबर गतिविधियां सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहीं। Israel, United Arab Emirates, Qatar, Bahrain, Kuwait, Lebanon और Cyprus जैसे कई देशों में इंटरनेट से जुड़े कैमरों को स्कैन करने और उन तक पहुंचने की कोशिशें दर्ज की गईं। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इन हमलों के पैटर्न और इस्तेमाल किए गए नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर से संकेत मिलता है कि इसके पीछे ईरान से जुड़े साइबर थ्रेट एक्टर्स हो सकते हैं।

    कैसे काम करता है कैमरा हैकिंग ऑपरेशन

    आज दुनिया भर में लाखों CCTV और IP कैमरे सीधे इंटरनेट से जुड़े हुए हैं। यही कनेक्टिविटी उन्हें साइबर हमलों के लिए आसान निशाना बना देती है। रिपोर्ट के मुताबिक हमलावर पहले इंटरनेट पर ऐसे कैमरों को स्कैन करते हैं जो पब्लिक नेटवर्क से जुड़े होते हैं। इसके बाद वे इन डिवाइस में मौजूद पुरानी सुरक्षा कमजोरियों का फायदा उठाकर सिस्टम में घुसने की कोशिश करते हैं।

    इन कैमरा ब्रांड्स को बनाया गया निशाना

    इस अभियान में खास तौर पर लोकप्रिय कैमरा ब्रांड Hikvision और Dahua Technology के डिवाइस को निशाना बनाया गया। रिसर्चर्स ने बताया कि हमलावरों ने इन कैमरों में मौजूद कई जानी-पहचानी कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश की। इनमें CVE-2017-7921, CVE-2021-36260 और CVE-2021-33044 जैसी सिक्योरिटी खामियां शामिल हैं।

    अगर हमला सफल हो जाता है, तो हैकर्स कैमरे के लाइव वीडियो फीड तक पहुंच सकते हैं। इससे उन्हें जमीन पर हो रही गतिविधियों की सीधी जानकारी मिल जाती है।

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    जंग में क्यों अहम हो सकते हैं हैक किए गए कैमरे

    रिसर्च के मुताबिक, अगर किसी इलाके में मिसाइल या ड्रोन हमला किया जाता है, तो आसपास लगे CCTV कैमरे हमले के बाद की स्थिति को दिखा सकते हैं। इससे हमलावर समझ सकते हैं कि टार्गेट को कितना नुकसान हुआ और क्या अगला हमला करना जरूरी है।

    इसके अलावा हमलावर इन कैमरों की मदद से हमले से पहले इलाके की गतिविधियों, सुरक्षा व्यवस्था और संभावित टार्गेट की लोकेशन की भी निगरानी कर सकते हैं।

    पहचान छिपाने के लिए VPN का इस्तेमाल

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हमलावरों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई तकनीकों का इस्तेमाल किया। रिसर्चर्स ने नेटवर्क ट्रैफिक में Mullvad, ProtonVPN, Surfshark और NordVPN जैसे VPN सर्विसेज के एग्जिट नोड्स देखे।

    इसके अलावा कई वर्चुअल प्राइवेट सर्वर (VPS) का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे असली लोकेशन को ट्रेस करना और मुश्किल हो जाता है।

    पहले भी दिखा ऐसा पैटर्न

    रिपोर्ट के मुताबिक, इसी तरह की कैमरा स्कैनिंग गतिविधियां 14 और 15 जनवरी को भी दर्ज की गई थीं। उस समय Iran में बड़े विरोध प्रदर्शन चल रहे थे और क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ रहा था। संभावित हमले की आशंका के बीच ईरान ने कुछ समय के लिए अपना एयरस्पेस भी बंद कर दिया था।

    रिसर्चर्स का मानना है कि इन घटनाओं का समय और कैमरा स्कैनिंग गतिविधियों का पैटर्न इस बात की ओर इशारा करता है कि साइबर और फिजिकल वॉर अब एक-दूसरे से गहराई से जुड़ चुके हैं।

    जंग का बदलता चेहरा

    चेकप्वाइंट रिसर्च की यह रिपोर्ट आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप की ओर इशारा करती है। अब युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं लड़े जाते। साइबर हमले, डिजिटल जासूसी, डेटा एनालिसिस और इंटरनेट से जुड़े डिवाइस भी युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

    स्मार्ट सिटी और स्मार्ट होम टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह खतरा और बढ़ जाता है। अगर इन डिवाइस की सुरक्षा मजबूत न हो, तो वही CCTV कैमरे जो सुरक्षा के लिए लगाए गए हैं, युद्ध में दुश्मन की आंखें बन सकते हैं।

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    One thought on “मिडिल ईस्ट जंग के बीच CCTV कैमरे बने नया साइबर हथियार”

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