नई दिल्ली: भारतीय डीपटेक स्टार्टअप पाणिनियन इंडिया ने स्वदेशी यंतुर 4.5 kN टर्बोफैन इंजन पेश किया। कंपनी ने इस इंजन को भारत की रक्षा और एयरोस्पेस आत्मनिर्भरता मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। यंतुर इंजन भविष्य के लंबी दूरी वाले ड्रोन, कॉम्बैट यूएवी और क्रूज मिसाइलों को शक्ति देगा। यह तकनीक भारत को छोटे और शक्तिशाली एयरोस्पेस इंजनों के लिए विदेशी निर्भरता घटाने में मदद करेगी। कंपनी ने इंजन को स्केलेबल बनाया, जिससे इसकी क्षमता भविष्य में 12.5 kN तक बढ़ाई जा सकेगी। पाणिनियन इंडिया ने इस इंजन को स्वायत्त L1 प्लेटफॉर्म के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया है। यह प्लेटफॉर्म रक्षा मंत्रालय के मेक-I कार्यक्रम के तहत रणनीतिक मिसाइल आवश्यकताओं को पूरा करेगा। कंपनी ने बताया कि कार्यक्रम का वैचारिक और विस्तृत डिजाइन चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
पांच पेटेंट से डिजिटल ट्विन तक, यंतुर इंजन बढ़ाएगा भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता
अब टीम इंजन सबसिस्टम परीक्षण, सत्यापन और पूर्ण प्रमाणन प्रक्रिया पर तेजी से काम कर रही है। यंतुर और स्वयत्त L1 कार्यक्रमों के तहत कंपनी ने पांच पेटेंट दावे भी दर्ज किए हैं। इन पेटेंटों में इंजन फैमिली आर्किटेक्चर और उन्नत कंप्रेसर तकनीक शामिल हैं। कंपनी ने कंबस्टर, डिफ्यूजर और नोजल डिजाइन के लिए नई तकनीकी संरचनाएं भी विकसित की हैं। डिजिटल ट्विन आधारित हेल्थ मॉनिटरिंग प्रणाली इंजन की निगरानी और रखरखाव क्षमता बढ़ाएगी। उन्नत विनिर्माण तकनीक कंपनी को जटिल एयरोस्पेस घटकों का स्थानीय उत्पादन करने में मदद करेगी। यंतुर इंजन का विकास भारत के निजी रक्षा उद्योग की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दर्शाता है।
यह परियोजना देश में स्वदेशी प्रोपल्शन तकनीक और निजी नवाचार को नई गति प्रदान कर सकती है। CEMILAC के पूर्व ग्रुप डायरेक्टर जी गौड़ा ने इस पहल को ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रयास DRDO वैज्ञानिकों द्वारा तैयार मजबूत तकनीकी नींव को आगे बढ़ाता है। गौड़ा ने पहले तेजस कार्यक्रम के GE404 और GE414 इंजन कार्यक्रमों की समीक्षा की थी। यंतुर इंजन भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और उन्नत एयरोस्पेस तकनीक के लिए महत्वपूर्ण क्षमता विकसित करेगा। आने वाले वर्षों में इसका स्केलेबल डिजाइन भारत की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करेगा।

