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    अरावली के पहाड़ों की हदें कर दी गईं तय, संकट में राजपूतों के मौन प्रहरी

    अरावली

    नई दिल्ली: भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल अरावली पर्वतमाला एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसमें केवल 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली पर्वत श्रृंखला का हिस्सा मानने की बात कही गई है। इस फैसले के बाद पर्यावरणविदों, स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने अपनी गहरी चिंता जाहिर की है। अरावली क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि नया मानदंड पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। उनका मानना है कि कम ऊंचाई वाली पहाड़ियां भी पारिस्थितिकी तंत्र में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि सरकार इन्हें अरावली से बाहर करती है, तो खनन और अतिक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।

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    सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अरावली पर्वतमाला पर पर्यावरणीय बहस को तेज किया

    केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन आशंकाओं को खारिज किया। उन्होंने कहा कि सरकार अरावली क्षेत्र में खनन को लेकर सख्त नियमों को पहले की तरह लागू रखेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने अरावली के 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र को पहले ही संरक्षित घोषित कर दिया है और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

    अरावली पर्वतमाला ने भारतीय इतिहास और संस्कृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मध्यकालीन भारत में इन दुर्गम पहाड़ियों ने राजपूत शासकों को बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा प्रदान की। महाराणा प्रताप ने मुगलों के खिलाफ छापामार युद्ध में अरावली के कठिन भूभाग का रणनीतिक रूप से उपयोग किया। कुंभलगढ़ और चित्तौड़गढ़ जैसे ऐतिहासिक किले अरावली पर्वत श्रृंखला की रणनीतिक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाते हैं। कभी राजपूतों की मौन प्रहरी कही जाने वाली अरावली की पहाड़ियां आज गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। शहरीकरण, अवैध खनन और बढ़ते पर्यावरणीय दबावों ने इस पर्वत श्रृंखला को कमजोर कर दिया है।

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    भौगोलिक विस्तार और पर्यावरणीय भूमिका

    वैज्ञानिकों के अनुसार, अरावली पर्वतमाला दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल है। प्रोटेरोजोइक युग में भू-गर्भीय प्रक्रियाओं ने इस पर्वत श्रृंखला का निर्माण किया, जब पृथ्वी पर जीवन की प्रारंभिक अवस्थाएं विकसित हो रही थीं। विशेषज्ञ अनुमान लगाते हैं कि अरावली लगभग 250 से 350 करोड़ वर्ष पुरानी है। वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि केवल ऊंचाई के आधार पर किसी पर्वत श्रृंखला की पहचान करना तर्कसंगत नहीं है।

    अरावली पर्वतमाला उत्तर-पश्चिमी भारत में फैली हुई है और गुजरात के पालनपुर से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा होते हुए दिल्ली तक लगभग 670 किलोमीटर तक विस्तार लेती है। इसकी औसत ऊंचाई 300 से 900 मीटर के बीच रहती है। गुरु शिखर अरावली की सबसे ऊंची चोटी है, जिसकी ऊंचाई 1,722 मीटर है और यह राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में स्थित है। यह पर्वत श्रृंखला भारत की जलवायु को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती है। अरावली थार रेगिस्तान के विस्तार को रोकती है और वर्षा चक्र को प्रभावित करती है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इसके स्वरूप में किसी भी तरह का बदलाव लंबे समय में गंभीर पर्यावरणीय प्रभाव पैदा कर सकता है।

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