सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के खिलाफ दायर याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई की। Supreme Court of India में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कई अहम निर्देश जारी किए। याचिका Mamata Banerjee और अन्य All India Trinamool Congress सांसदों ने दायर की थी। अदालत ने चुनाव आयोग को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से सलाह लेने का निर्देश दिया। इसके बाद आयोग को एक औपचारिक नोटिफिकेशन जारी करने को कहा गया। अदालत ने एक अपीलेट ट्रिब्यूनल गठित करने का भी आदेश दिया। इस ट्रिब्यूनल में एक पूर्व चीफ जस्टिस और अन्य जज शामिल किए जाएंगे। यह ट्रिब्यूनल उन अपीलों की सुनवाई करेगा जिन्हें ज्यूडिशियल ऑफिसर खारिज कर रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारी हर अस्वीकृति का कारण लिखित रूप में बताएंगे। अदालत ने यह भी कहा कि ट्रिब्यूनल के संचालन का पूरा खर्च चुनाव आयोग उठाएगा।
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CJI ने एडवांस पिटीशन पर जताई नाराजगी, दोनों पक्षों की सच्चाई पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील Menaka Guruswamy ने अदालत को स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने अदालत को बताया कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स ने बड़ी संख्या में मामलों पर काम किया। अधिकारियों ने अब तक करीब सात लाख मामलों को प्रोसेस किया है। कुल मिलाकर लगभग तिरसठ लाख मामलों की प्रक्रिया अभी जारी है। इनमें से करीब सत्तावन लाख मामलों का निपटारा अभी बाकी बताया गया। अदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया और प्रक्रिया की गति पर सवाल उठाए। वकील ने अदालत को बताया कि अधिकारी लगातार काम करके मामलों को निपटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन प्रक्रिया को तेज करने के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रहा है। अदालत ने सभी पक्षों से पारदर्शिता और जिम्मेदारी बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने कुछ याचिकाओं पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि एडवांस पिटीशन दाखिल करने से गलत संदेश जाता है। अदालत ने कहा कि ऐसी याचिकाएं न्यायिक व्यवस्था पर अविश्वास दिखाती हैं। मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया कि याचिकाकर्ताओं ने ऐसी अर्जी दाखिल करने की हिम्मत कैसे की। उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स पर सवाल उठाना उचित नहीं है। अदालत ने इस मामले में सख्त चेतावनी भी जारी की। अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सीधे आरोप गंभीर मामला है। इस दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया कि अवमानना नोटिस जारी किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि वह उसी भाषा में जवाब देगी जिसकी अपेक्षा की जा रही है। इस टिप्पणी ने सुनवाई के दौरान माहौल को काफी गंभीर बना दिया।
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SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को ट्रिब्यूनल बनाने का निर्देश
इस दौरान वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से न्यायिक अधिकारियों पर सवाल नहीं उठाए गए। उन्होंने अदालत को बताया कि ऐसी टिप्पणी सुनकर उन्हें भी आश्चर्य हुआ। अदालत ने फिर कहा कि मामले में दोनों पक्षों की स्थिति पर संदेह पैदा हो रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि अदालत को दोनों पक्षों पर शक हो रहा है। अदालत ने कहा कि उसे पूरे मामले की सच्चाई समझनी होगी। अदालत ने सभी पक्षों को जिम्मेदारी से पेश आने की सलाह दी। अदालत ने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में अनुशासन और सम्मान जरूरी है। अदालत ने आगे की सुनवाई में तथ्यों को स्पष्ट करने पर जोर दिया। इस दौरान अदालत ने अधिकारियों के काम की सराहना भी की।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रशासनिक प्रगति की जानकारी भी साझा की। अदालत ने कहा कि Calcutta High Court के चीफ जस्टिस ने ताजा जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अब तक दस लाख से अधिक आपत्तियों का निपटारा किया जा चुका है। अदालत को बताया गया कि सैकड़ों ज्यूडिशियल ऑफिसर्स इस प्रक्रिया में लगे हैं। पश्चिम बंगाल के अलावा ओडिशा और झारखंड से भी अधिकारी तैनात किए गए हैं। ये अधिकारी दिन-रात काम करके मामलों का निपटारा कर रहे हैं। अदालत ने चुनाव आयोग को अधिकारियों को पूरी लॉजिस्टिक सहायता देने का निर्देश दिया। अदालत ने राज्य सरकार को भी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा। अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की छुट्टियां तक रद्द कर दी गई हैं। इसलिए प्रशासन को उनके काम में किसी भी तरह की बाधा नहीं आने देनी चाहिए।
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