चुरू शहर को अब जलवायु परिवर्तन का प्रत्यक्ष उदाहरण माना जा रहा है. वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में यहां के औसत तापमान में लगभग 1.5°C की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यही नहीं, दिन और रात के तापमान में जो अंतर पहले लगभग 15°C था, वह अब बढ़कर 20°C से भी अधिक हो गया है. यह बदलाव सिर्फ तापमान में ही नहीं, बल्कि मौसम के पूरे व्यवहार में दिखाई दे रहा है, जो आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकता है. 4.6 डिग्री से लेकर 51 डिग्री तक का तापमान — आखिर चुरू में इतनी कड़ाके की सर्दी और झुलसाने वाली गर्मी क्यों होती है, इसका जवाब जलवायु के इस असंतुलन में छिपा है.
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राजस्थान के चुरू जिले की एक खास पहचान है – यहां मौसम का मिजाज बेहद असामान्य होता है। सर्दियों के दौरान, खासकर दिसंबर और जनवरी में, तापमान -4.6°C तक गिर जाता है, जिससे जानलेवा ठंड पड़ती है. वहीं दूसरी ओर, गर्मियों में तापमान 50°C को भी पार कर जाता है. यह बेहद बड़ा तापमान अंतर इसे देश के उन चुनिंदा इलाकों में शामिल करता है, जहां मौसम इतने चरम स्तर पर पहुंचता है.
भौगोलिक स्थितियाँ और झुलसाने वाले चरम मौसम का रहस्य
हाल ही में यहां का तापमान 45.8°C दर्ज किया गया, जिससे चुरू फिर से भारत के सबसे गर्म स्थानों में शामिल हो गया. इस तरह की घटनाएं अब पहले से कहीं ज्यादा बार हो रही हैं और इनकी तीव्रता भी बढ़ गई है. मौसम वैज्ञानिक इसे जलवायु असंतुलन, तेजी से होते शहरीकरण, हरियाली की कमी और स्थानीय भौगोलिक स्थिति से जोड़कर देख रहे हैं. यह सभी कारण मिलकर चुरू को एक संवेदनशील जलवायु क्षेत्र बना रहे हैं.
चुरू की भौगोलिक संरचना, रेगिस्तानी मिट्टी, कम नमी और वातावरण में हो रहे लगातार बदलाव यहां के मौसम को और भी अधिक अस्थिर बना रहे हैं. दिन के समय सूरज की गर्मी सीधे ज़मीन को तपाती है और रात में वही ज़मीन तेजी से ठंडी हो जाती है, जिससे तापमान में अचानक बदलाव होता है. इन कारणों से चुरू भारत के सबसे अधिक तापमान बदलाव वाले क्षेत्रों में गिना जाने लगा है, जहां मौसम अब अनुमान से कहीं ज़्यादा अप्रत्याशित हो चुका है.


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