नेपाल लगातार दूसरे दिन हिंसा की आग में जलता रहा और सरकार असहाय दिखी।सोशल मीडिया प्रतिबंध ने गुस्से की चिंगारी को भड़काया और भ्रष्टाचार ने आग को और बढ़ाया।युवाओं और छात्रों ने आक्रोशित होकर सड़कों पर प्रदर्शन किए जिन्हें सरकार ने बलपूर्वक दबाया।प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने गोलीबारी और बल प्रयोग का आदेश दिया, जिससे हालात और बिगड़ गए।
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नेपाल संकट: विरोध से इस्तीफे और सरकार का संकट
प्रधानमंत्री ओली ने हिंसा के लिए घुसपैठियों को दोषी ठहराया लेकिन लोगों ने उन्हें नकारा।सोशल मीडिया प्रतिबंध हटाने में देर ने जनता का गुस्सा और अधिक भड़का दिया।सरकार के मंत्रियों ने भी इस्तीफे देकर ओली को और कमजोर किया सहयोगी दलों ने ओली से पद छोड़ने की मांग की और विपक्ष ने जनता के साथ खड़े होने की बात कही।नेपाल की बार-बार बदलती सरकारों और भ्रष्टाचार ने युवाओं को गहरी निराशा दी।17 सालों में 14 सरकारें बदलीं और लगभग हर नेता पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे।युवाओं ने सोशल मीडिया पर नेपो बेबीज और राजनीतिक परिवारों की विलासिता को निशाना बनाया।बेरोजगारी और पलायन ने आंदोलन को और गहरा कर दिया, जिससे असंतोष ज्वालामुखी की तरह फूटा।
अधिकांश प्रदर्शनकारी 28 साल से कम उम्र के थे, इसलिए इसे जेन-जी का आंदोलन कहा गया।युवाओं के लिए सोशल मीडिया गुस्सा जाहिर करने और भ्रष्टाचार उजागर करने का प्रमुख हथियार था।प्रतिबंध ने उनकी आवाज छीन ली और उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया।नेपाल की राजनीतिक जमात ने वर्षों से सत्ता पर कब्जा जमाया और जनता को निराश किया।
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