शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली। इसके कारण सेंसेक्स और निफ्टी समेत लगभग सभी प्रमुख सूचकांक दबाव में आ गए। अचानक आई इस गिरावट से निवेशकों को करीब 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा, बाजार की कमजोरी का असर लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी साफ दिखा।
कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार की तेजी के बाद शुक्रवार को बाजार की रफ्तार थम गई। वहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। नतीजतन, पूरे बाजार में कमजोरी का माहौल बना रहा।
इस गिरावट के चलते बीएसई का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर 452.52 लाख करोड़ रुपये रह गया। सेंसेक्स 770 अंक टूटकर 81,537 पर बंद हुआ। इसी तरह, निफ्टी 241 अंकों की गिरावट के साथ 25,048 पर क्लोज हुआ। इसके अलावा, बैंक निफ्टी में करीब 700 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। साथ ही, स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स 700 से 1000 अंकों तक लुढ़क गए।
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बाजार में हड़कंप: 6 लाख करोड़ का नुकसान, अडानी स्टॉक्स में 13% की तेज गिरावट
बीएसई-30 के सिर्फ 6 शेयर ही बढ़त में बंद हो पाए। इसके विपरीत, बाकी 24 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। खास तौर पर, अडानी समूह के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। अडानी ग्रीन एनर्जी, अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पावर, अडानी टोटल गैस और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस जैसे शेयर 13 प्रतिशत तक टूट गए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बड़ी गिरावट के पीछे विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली एक अहम वजह रही। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने हालिया सत्र में शुद्ध रूप से शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने कुछ हद तक बाजार को सहारा दिया। इसके बावजूद, भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका जताई जा रही है।
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