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    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नज़दीक आते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसके अलावा, उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसी बीच, ममता बनर्जी ने एसआईआर के विरोध में दिल्ली पहुंचे टीएमसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। सभी सदस्य काले कपड़ों में नजर आए। प्रतिनिधिमंडल में 12 लोग भी शामिल थे। इनमें कथित तौर पर गलत तरीके से मृत घोषित किए गए लोग और उनके परिजन शामिल थे। इसके बाद, दल ने सोमवार को दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की। बैठक के बाद ममता बनर्जी नाराज़गी में बाहर निकलीं। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनका अपमान किया।

    इसके साथ ही, उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप भी लगाया। इसके पहले, बंग भवन में ममता बनर्जी की दिल्ली पुलिस के साथ तीखी नोकझोंक हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी द्वारा लाए गए एसआईआर प्रभावित परिवारों को परेशान किया जा रहा है।

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    मतदाता सूची से नाम कटने की आशंका, अल्पसंख्यक वोटों को लेकर TMC की चिंता

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच, मुख्य रूप से, ममता बनर्जी की चिंता यह है कि यदि अंतिम मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाते हैं I जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाता भी शामिल हो सकते हैं, तो इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। इसके अलावा, वर्ष 2011 से मुस्लिम मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा लगातार विधानसभा चुनावों में टीएमसी के समर्थन में वोट करता रहा है, जबकि राज्य की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत से अधिक है।

    इसी वजह से, ममता बनर्जी को यह भी अंदेशा है कि 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के तुरंत बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सकता है। इसलिए, वह पहले से ही चुनावी मोड में आ गई हैं और इसके साथ ही, भाजपा के खिलाफ बंगाल के साथ-साथ दिल्ली में भी सड़कों पर उतरकर राजनीतिक अभियान चला रही हैं।

    ओबीसी सूची और अन्य मुद्दों पर नाराज़गी, भवानीपुर में ममता ने सीधे हस्तक्षेप किया

    राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची में बदलाव, बंगाल में संशोधित वक्फ कानून के लागू होने और अन्य राज्यों में प्रवासी मजदूरों के कथित उत्पीड़न जैसे मुद्दों को लेकर मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग में ममता बनर्जी से नाराज़गी देखी जा रही है। इसके कारण, मुख्यमंत्री का आक्रामक रुख एसआईआर को लेकर दिखाई दे रहा है। यह रुख अल्पसंख्यक मतदाताओं को फिर से तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में एकजुट करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इसी बीच, ममता बनर्जी को कोलकाता स्थित अपने विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में भी सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा।

    30 नवंबर 2025 को उन्हें जानकारी मिली कि उनके निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची के ड्राफ्ट से करीब 45,000 नाम हटाए गए हैं। इसके बाद, उन्होंने स्थानीय टीएमसी नेताओं, पार्षदों और बूथ स्तर के एजेंटों की बैठक बुलाई। इसके साथ ही, उन्होंने सभी सदस्यों को निर्देश दिया कि वे घर-घर जाकर सभी मतदाताओं तक पहुंचें और सूची को त्रुटिरहित रूप से अपडेट कराएँ।

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