• Fri. Mar 6th, 2026
    तेल

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को झकझोर दिया है। युद्ध का दायरा अब और फैलता दिख रहा है। ईरान ने सऊदी अरब के तेल रिफाइनरों पर हमले किए हैं और यह चेतावनी भी दी है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से कोई तेल टैंकर या जहाज गुजरेगा तो वह उसे निशाना बनाएगा। यह वही समुद्री गलियारा है, जहां से दुनिया करीब 20 फीसदी ऊर्जा का आयात करती है और भारत अपना लगभग 50 फीसदी कच्चा तेल मंगाता है।

    इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 10 फीसदी चढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि मंगलवार को भी इसमें 2.55 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई। यूरोप में गैस की कीमतें 40 फीसदी से ज्यादा उछल गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संकट लंबा खिंचता है तो तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है।

    हालांकि भारत ने इस संभावित संकट से निपटने के लिए सक्रिय रणनीति तैयार कर ली है। सरकार और उद्योग के बीच लगातार बातचीत चल रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर अस्थायी रोक लगाने पर विचार कर रही है। फिलहाल भारत अपने पेट्रोल का करीब एक-तिहाई, डीजल का एक-चौथाई और एविएशन फ्यूल का लगभग आधा हिस्सा निर्यात करता है।

    Also Read: अली ख़ामेनेई की मौत से मुस्लिम देशों पर क्या असर पड़ेगा

    रूस से आयात बढ़ाने और राशनिंग तक के विकल्प तैयार

    सबसे बड़ी चुनौती एलपीजी को लेकर है। भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 85 से 90 फीसदी आयात करता है और मौजूदा इन्वेंटरी सीमित है। उद्योग के अनुमान के मुताबिक, अगर आपूर्ति बाधित होती है तो ऑनशोर स्टॉक और रास्ते में मौजूद कार्गो मिलाकर कुल भंडार दो हफ्तों से भी कम का रह जाएगा। इसे देखते हुए सरकारी रिफाइनर इंडियन ऑयल, HPCL और BPCL ने कुछ इंटीग्रेटेड रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन बढ़ाना शुरू कर दिया है।

    इसके अलावा सरकार रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर एलपीजी की राशनिंग जैसे डिमांड-मैनेजमेंट कदम उठाने की भी तैयारी कर रही है। भारत के पास फिलहाल 20 से 25 दिनों का रणनीतिक कच्चा तेल भंडार मौजूद है, जो आपात स्थिति में सहारा दे सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की सैन्य और तकनीकी क्षमता अमेरिका और इजरायल की तुलना में सीमित है, इसलिए संघर्ष लंबा नहीं चलेगा। हालांकि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अनुमान है कि यह युद्ध चार हफ्तों तक चल सकता है।

    कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट का यह संकट वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, लेकिन भारत ने समय रहते सक्रिय कदम उठाकर खुद को संभावित झटके से बचाने की तैयारी कर ली है।

    Also Read: ख्वाजा आसिफ का इजरायल-भारत गठजोड़ पर हमला

    Share With Your Friends If you Loved it!
    One thought on “तेल संकट से हिल रही दुनिया, लेकिन भारत पूरी तरह तैयार”

    Comments are closed.