अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है, और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) इस संघर्ष में तेजी से एक प्रमुख निशाने के रूप में उभर रहा है। शुरुआत में ईरान ने अपनी रणनीति केवल इसराइल तक सीमित रखी थी, लेकिन अब उसने इसे बदलते हुए खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों पर भी हमले तेज कर दिए हैं। ईरान ने हजारों ड्रोन और मिसाइलों के जरिए इन देशों को निशाना बनाया है।
ईरान ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमला करेगा। इसी रणनीति के तहत उसने यूएई को खास तौर पर निशाना बनाया, ताकि अमेरिका और इसराइल को सीधा संदेश दिया जा सके, क्योंकि दोनों देशों के यूएई के साथ मजबूत संबंध हैं। जब अमेरिका और इसराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया, तो तेहरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए न केवल इसराइल बल्कि अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों पर भी हमले किए।
इन हमलों में बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब, कतर, ओमान और खासकर यूएई शामिल रहे। खाड़ी देशों के अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने सिर्फ सैन्य ठिकानों को ही नहीं बल्कि नागरिक ढांचे को भी निशाना बनाया। हवाई अड्डे, होटल, रिहायशी इलाके और ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण केंद्र इन हमलों की चपेट में आए।
Also Read: 2000 किलोमीटर दूर से भारत को मिली बड़ी राहत जहाजों में भरकर आ रही एलपीजी
ईरान इस संघर्ष को व्यापक बनाकर सभी पक्षों के लिए युद्ध की लागत बढ़ाना चाहता है। साथ ही वह खाड़ी देशों पर दबाव बना रहा है कि वे अपने सहयोगी अमेरिका को युद्धविराम के लिए मजबूर करें। इस तरह, ईरान अपनी रणनीति के जरिए क्षेत्रीय और वैश्विक दबाव बनाकर युद्ध की दिशा को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
यूएई पर बढ़ते हमले और कड़ा रुख
ईरानी हमलों के जवाब में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सख्त रुख अपनाया है। यूएई ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रयासों में शामिल होने की चेतावनी दी है। यह रुख उसकी पारंपरिक नीति से अलग है, जिसमें वह संवाद और संतुलित संबंधों पर जोर देता रहा है।
क्षेत्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, युद्ध के शुरुआती चरण में ईरान ने इसराइल के बजाय खाड़ी देशों को अधिक निशाना बनाया। अल जज़ीरा की रिपोर्ट बताती है कि पहले 11 दिनों में इसराइल पर 433 हमले हुए, जबकि अरब देशों पर लगभग 3,100 हमले किए गए। इससे साफ होता है कि ईरान ने अपनी रणनीति में खाड़ी क्षेत्र को प्राथमिकता दी।
पहले तीन हफ्तों के आंकड़ों के अनुसार, यूएई सबसे ज्यादा हमलों का शिकार बना। दुबई पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर के प्रमुख मोहम्मद बहारून ने कहा कि ईरान यूएई को “आसान निशाना” मानता है। उनका मानना है कि ईरान यूएई को “डोमिनो इफेक्ट” की पहली कड़ी के रूप में देखता है।
डोमिनो इफेक्ट का मतलब है कि एक घटना कई अन्य घटनाओं को जन्म देती है। बहारून के अनुसार, ईरानी नेतृत्व सोचता है कि अगर इस कड़ी का एक हिस्सा कमजोर होता है, तो बाकी हिस्से भी प्रभावित होंगे। इसी रणनीति के तहत ईरान यूएई पर लगातार दबाव बना रहा है।
Also Read: उत्तर भारत में मौसम बदलेगा: MP-राजस्थान में बारिश, पहाड़ी राज्यों में हिमपात की संभावना


[…] […]