केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने शिक्षा ट्रेनिंग व्यवस्था को भविष्य के अनुरूप बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने योजना बनाई है कि आने वाले सत्र से छात्रों को शुरुआती कक्षाओं से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बुनियादी जानकारी दी जाए। इसका उद्देश्य बच्चों को नई तकनीकों से परिचित कराना और उन्हें भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करना है।
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सीबीएसई का मानना है कि एआई को सिर्फ एक नए विषय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बोर्ड इसे छात्रों की सोच, समस्या समाधान क्षमता और तकनीकी समझ को विकसित करने के साधन के रूप में देख रहा है। इसी दिशा में कक्षा 3 से ही बच्चों को एआई की शुरुआती अवधारणाओं से परिचित कराने की तैयारी की जा रही है।
कक्षा 3 से एआई शिक्षा की तैयारी में शिक्षक प्रशिक्षण बनी बड़ी चुनौती
हालांकि इस योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती शिक्षकों की तैयारी को लेकर सामने आ रही है। एआई जैसे जटिल विषय को छोटे बच्चों को समझाने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी। इसके लिए स्कूलों और शिक्षकों को नई तकनीक और डिजिटल उपकरणों की समझ भी विकसित करनी होगी।
विश्व बैंक की एक रिपोर्ट ने भी इस मुद्दे को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर शिक्षकों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिला तो एआई जैसे विषय को प्रभावी तरीके से पढ़ाना मुश्किल हो सकता है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में बड़ी संख्या में शिक्षक अभी तक डिजिटल और तकनीकी कौशल में पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं हैं। ऐसे में एआई शिक्षा को सफल बनाने के लिए बड़े स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने की जरूरत होगी। इसके साथ ही स्कूलों में जरूरी तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी।
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सरकार और शिक्षा संस्थानों के सामने अब यह चुनौती है कि वे एआई शिक्षा को लागू करने से पहले शिक्षकों को पूरी तरह तैयार करें। इसके लिए प्रशिक्षण, डिजिटल संसाधन और आधुनिक पाठ्यक्रम की व्यवस्था करना जरूरी होगा। तभी छात्रों को तकनीकी रूप से सक्षम और भविष्य के लिए तैयार बनाया जा सकेगा।


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