‘चिरैया’ नाम की यह सीरीज़ हाल ही में जियोहॉटस्टार पर रिलीज हुई है। इसे अब तक लाखों लोग देख चुके हैं। यह प्लेटफ़ॉर्म की लोकप्रिय हिंदी सीरीज़ में शामिल हो गई है।
मीडिया आलोचकों ने सीरीज़ की सराहना की है। उनका कहना है कि यह एक ऐसे मुद्दे को सामने लाती है, जिसे समाज अक्सर छिपाता है। इसने सोशल मीडिया पर सहमति और महिला विरोधी सोच पर बहस छेड़ दी है। हालांकि, कुछ लोगों ने इसे ‘पुरुष विरोधी’ बताया है। कुछ ने कहा कि यह शादी की पवित्रता को कमजोर करती है।
स्क्रिप्ट राइटर दिवी निधि शर्मा के अनुसार, कहानी दो महिलाओं पर केंद्रित है। इनमें कमलेश और पूजा शामिल हैं।
चिरैया सिरीज़ ने सहमति के महत्व को सामने रखा
दिव्या दत्ता ने कहा कि यह सीरीज़ सहमति की अहमियत को सामने लाती है। उन्होंने खास तौर पर शादी जैसे रिश्ते में इसकी जरूरत पर जोर दिया, जिसे समाज बेहद पवित्र मानता है।
उन्होंने कहा कि मैरिटल रेप पर बात करना बहुत मुश्किल होता है। इस स्थिति से गुजरने वाली कई महिलाएं इसे अपनी निजी कहानी मानती हैं। उन्हें डर रहता है कि अगर वे आवाज उठाएंगी, तो बदनामी होगी और परिवार टूट सकता है।कमलेश एक मिडिल क्लास गृहिणी हैं। वह मानती हैं कि महिलाओं को घर और रसोई तक सीमित रहना चाहिए। दूसरी ओर, पूजा पढ़ी-लिखी और जागरूक है। वह बराबरी में विश्वास रखती है। इस किरदार को प्रसन्ना बिष्ट ने निभाया है।
कहानी में मोड़ तब आता है जब पूजा की शादी अरुण से होती है। अरुण, कमलेश का देवर है। कमलेश ने उसे बेटे की तरह पाला है।
शुरुआत में अरुण एक आदर्श पति लगता है। लेकिन शादी की पहली रात ही वह पूजा के साथ जबरदस्ती करता है। इस घटना से पूजा के सपने टूट जाते हैं।
पूजा इसका विरोध करती है। जवाब में अरुण इसे अपना ‘हक़’ बताता है। वह दावा करता है कि भारत में मैरिटल रेप अपराध नहीं है। इसलिए इसके खिलाफ कोई क़ानून नहीं है।
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