ताइवान ने शेयर बाज़ार मूल्यांकन में भारत को पीछे छोड़कर वैश्विक निवेशकों का ध्यान पूरी तरह आकर्षित किया। सोमवार तक ताइवान का कुल स्टॉक मार्केट मूल्य बढ़कर 4.95 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया था। वहीं, भारतीय शेयर बाज़ारों का कुल मूल्य घटकर करीब 4.92 ट्रिलियन डॉलर दर्ज हुआ है। इसके साथ ही ताइवान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाज़ार बनकर उभरकर सामने आया है। हालांकि, भारत की अर्थव्यवस्था अब भी ताइवान की तुलना में कई गुना बड़ी बनी हुई है। फिर भी, छोटे आर्थिक आकार वाला ताइवान बाज़ार मूल्यांकन में भारत से आगे निकल गया है। दरअसल, ताइवान की इस तेज़ बढ़त के पीछे टीएसएमसी कंपनी के शेयरों में बड़ी उछाल रही। टीएसएमसी दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर निर्माता कंपनी मानी जाती है और एआई क्षेत्र में अग्रणी बनी।
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ताइवान: एआई बूम के बीच भारत से निवेश खिसका, बढ़ी चिंता
इस साल कंपनी के शेयरों में लगभग 49 प्रतिशत तेजी आई, जिससे निवेशकों का भरोसा और बढ़ा। इसके अलावा, ताइवानी टेक्नोलॉजी कंपनियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक मांग का भारी फायदा मिला है। नतीजतन, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे टेक हब वैश्विक निवेश आकर्षित करने में लगातार सफल रहे। वहीं, भारत तकनीकी नवाचार और एआई आधारित कंपनियों की कमी से संघर्ष करता दिखाई दिया है। दूसरी तरफ, विदेशी निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयर बाज़ार से रिकॉर्ड स्तर पर पूंजी निकाली है। महंगे शेयर, कमजोर रुपया और बढ़ती ऊर्जा लागत ने निवेशकों की चिंता लगातार बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदेशी निवेशक अब तक भारतीय बाज़ारों से करीब 24 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। इसी दौरान, सेंसेक्स में लगभग 10 प्रतिशत गिरावट दर्ज हुई और निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा।
इसके अलावा, एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत की हिस्सेदारी भी तेजी से घटी है। विशेषज्ञों के अनुसार, एआई क्षेत्र में कमजोर उपस्थिति भारत के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। आर्थिक विशेषज्ञ रुचिर शर्मा ने भी भारत की तकनीकी कमजोरी को मौजूदा संकट का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेशक अब एआई, सेमीकंडक्टर और कंप्यूटिंग तकनीकों पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इसके विपरीत, भारत अब भी आउटसोर्सिंग आधारित आईटी मॉडल पर अत्यधिक निर्भर बना हुआ दिखाई देता है। पूर्व आरबीआई गवर्नर डी सुब्बाराव ने भी भारत के तकनीकी पिछड़ने को गंभीर चिंता बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि तकनीकी नवाचार की कमी भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा सकती है। अब विशेषज्ञ मान रहे हैं कि एआई दौड़ में पिछड़ना भारत के लिए लंबी चुनौती साबित हो सकता है।
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