उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारे में हुए विवाद को लेकर पिछले कुछ दिनों से चर्चा जारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पुलिस, आईटीबीपी और सेना के जवानों को मौके पर तैनात किया। घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की खबरें और दावे सामने आए। कुछ रिपोर्टों में गुरुद्वारे पर कब्जा करने और लोगों को बंधक बनाने जैसी बातें भी कही गईं। हालांकि, पुलिस ने इन दावों को शुरुआत से ही गलत बताया और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।
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रुद्रप्रयाग गुरुद्वारा विवाद: पुलिस ने अफवाहों को किया खारिज, सामने रखी पूरी सच्चाई
जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम कुछ निहंग श्रद्धालु गुरुद्वारे की तीसरी मंजिल पर पहुंच गए थे। घटना के दौरान पुलिस, जिला प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन समिति लगातार उनसे बातचीत करती रही। अधिकारियों ने स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से संभालने का प्रयास किया। प्रशासन ने किसी भी प्रकार के टकराव से बचने के लिए सतर्कता बरती। बातचीत के जरिए तनाव कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
गढ़वाल के इंस्पेक्टर जनरल राजीव स्वरूप ने विवाद की असली वजह स्पष्ट करते हुए बताया कि मामला निहंग श्रद्धालुओं और गुरुद्वारा प्रबंधन के बीच हुए मतभेद से शुरू हुआ था। दोनों पक्षों के बीच लंगर के दौरान किसी बात को लेकर बहस हो गई। इसके बाद गुरुद्वारा प्रबंधन ने आपातकालीन सेवा 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। पुलिस की मौजूदगी से कुछ श्रद्धालु घबरा गए और छत पर जाकर खुद को बंद कर लिया।
नागरासू गुरुद्वारा मामले पर IG का खुलासा, निहंग विवाद की असल वजह आई सामने
आईजी राजीव स्वरूप ने कहा कि यह विवाद मुख्य रूप से गुरुद्वारा प्रबंधन और वहां आए निहंग श्रद्धालुओं के बीच का आंतरिक मामला था। उन्होंने यह भी बताया कि प्रबंधन समिति के कुछ सदस्य भी निहंग समुदाय से जुड़े हुए हैं। जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत की। अधिकारियों ने समझाइश देकर माहौल को शांत कराया। प्रशासन ने पूरे मामले को संवेदनशीलता के साथ संभाला और किसी बड़े विवाद को टाल दिया।
पुलिस के अनुसार, वर्तमान में स्थिति पूरी तरह सामान्य और शांतिपूर्ण है। प्रशासन अब उन लोगों की पहचान करने में जुटा है जिन्होंने सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने की कोशिश की। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि घटना को कर्णप्रयाग की पुरानी झड़प से जोड़कर अफवाहें क्यों फैलाई गईं। अधिकारियों का मानना है कि कुछ तत्वों ने जानबूझकर भ्रम पैदा करने और चारधाम व हेमकुंड साहिब यात्रा को प्रभावित करने की कोशिश की। पुलिस ने चेतावनी दी है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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