दिल्ली में ट्रैफिक जाम कम करने के लिए नई योजना तैयार की गई है। इसके तहत 25 प्रमुख चौराहों की व्यवस्था बदली जाएगी। अधिकारी ट्रैफिक सिग्नलों की जगह बैक-टू-बैक यू-टर्न मॉडल लागू करेंगे। इससे वाहनों की आवाजाही पहले से अधिक सुचारु रहने की उम्मीद है। तकनीकी जांच के बाद संबंधित एजेंसियों ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब विभाग चरणबद्ध तरीके से योजना लागू करेगा। इसके अलावा, चालक चौराहों पर कम समय तक रुकेंगे। इससे सफर तेज और सुविधाजनक बनेगा। वहीं, वाहनों की औसत गति भी बढ़ने की संभावना है। कम रुकावट से ईंधन की बचत होगी। साथ ही, प्रदूषण का स्तर भी घट सकता है। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। इसलिए व्यस्त मार्गों पर दबाव भी पहले की तुलना में कम होगा।
फ्लाईओवर की जगह अपनाया जाएगा नया ट्रैफिक मॉडल
अधिकारी इस बार फ्लाईओवर बनाने के बजाय सड़क डिजाइन सुधारने पर जोर दे रहे हैं। नई योजना के तहत चयनित चौराहों से ट्रैफिक सिग्नल हटाए जाएंगे। उनकी जगह निर्धारित स्थानों पर यू-टर्न बनाए जाएंगे। इससे सीधे जाने वाले वाहन बिना रुके आगे बढ़ सकेंगे। वहीं, दिशा बदलने वाले वाहन आगे जाकर सुरक्षित यू-टर्न लेंगे। इसके बाद वे अपनी लेन में वापस आ जाएंगे। इस व्यवस्था से चौराहों पर भीड़ कम होगी। साथ ही, ट्रैफिक का प्रवाह लगातार बना रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि यह मॉडल मौजूदा सड़क ढांचे का बेहतर उपयोग करेगा। इसलिए बड़े निर्माण कार्यों की जरूरत भी कम पड़ेगी। इसके अलावा, सीमित संसाधनों में बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है। नई व्यवस्था सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन दोनों को मजबूत बनाएगी।
अधिकारियों के अनुसार यह मॉडल कम लागत में बेहतर परिणाम देगा। खासकर घनी आबादी वाले इलाकों को इसका लाभ मिलेगा। वहां बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाना आसान नहीं है। जमीन की कमी भी बड़ी चुनौती बनी रहती है। इसके अलावा, मेट्रो और अन्य निर्माण कार्य भी बाधा बनते हैं। इसलिए विभाग ने इस योजना को प्राथमिकता दी है। ट्रैफिक पुलिस ने 23 जून को तकनीकी जांच पूरी की। इसके बाद प्रस्ताव को स्वीकृति मिली। वहीं, विशेषज्ञों ने सीआरआरआई के सुझाव भी शामिल किए। विस्तृत ट्रैफिक सर्वे के दौरान कई व्यस्त मार्गों का अध्ययन किया गया। सर्वे में जाम के प्रमुख कारणों की पहचान हुई। अब विभाग अंतिम कार्ययोजना तैयार करेगा। इसके बाद योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
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इन प्रमुख सड़कों को बनाया जाएगा सिग्नल-फ्री
योजना में दिल्ली की कई व्यस्त सड़कों को शामिल किया गया है। इनमें नजफगढ़ रोड और भारतेन्दु हरिश्चंद्र मार्ग प्रमुख हैं। इसके अलावा, जीटी रोड का अहम हिस्सा भी सूची में शामिल है। राजौरी गार्डन से करमपुरा तक बदलाव किए जाएंगे। वहीं, पंजाबी बाग से टिकरी बॉर्डर मार्ग भी शामिल रहेगा। मथुरा रोड और महरौली-गुरुग्राम रोड पर भी काम होगा। आउटर रिंग रोड के कुछ हिस्सों में बदलाव प्रस्तावित हैं। रोड नंबर 71 और आईटीओ कॉरिडोर भी योजना का हिस्सा हैं। कालिंदी कुंज, एयरपोर्ट क्षेत्र और पंखा रोड भी शामिल किए गए हैं। इसके अलावा, महरौली-साकेत-संगम विहार बेल्ट पर भी नया मॉडल लागू होगा। विभाग जरूरत के अनुसार हर मार्ग का डिजाइन बदलेगा। इससे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनने की उम्मीद है।
ट्रैफिक अध्ययन में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। कई सड़कों पर कम दूरी में कई ट्रैफिक सिग्नल मौजूद हैं। इसलिए वाहनों को बार-बार रुकना पड़ता है। इससे ट्रैफिक की रफ्तार लगातार प्रभावित होती है। भारतेन्दु हरिश्चंद्र मार्ग इसका बड़ा उदाहरण माना गया है। यहां दो किलोमीटर में 11 ट्रैफिक सिग्नल हैं। वहीं, रोड नंबर 71 पर भी कई बार रुकना पड़ता है। इसके कारण पीक आवर्स में लंबा जाम लग जाता है। साथ ही, आसपास की सड़कों पर भी दबाव बढ़ जाता है। नई योजना इस समस्या को कम करने का प्रयास करेगी। हालांकि, किसी भी बदलाव से पहले प्रत्येक स्थान का सुरक्षा मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों का लक्ष्य सुरक्षित, तेज और बेहतर यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
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