लोकसभा के मॉनसून सत्र में अखिलेश यादव महिला आरक्षण मुद्दे पर बदले हुए रुख के साथ नजर आए। समाजवादी पार्टी ने महिला आरक्षण लागू करने की मांग का समर्थन किया। साथ ही परिसीमन बिल के जरिए उच्च सदन में सीटें बढ़ाने की बात भी उठाई। इस बदलाव ने राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू कर दी। 16 अप्रैल 2026 को संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर चर्चा हुई थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अखिलेश यादव को अपना “मित्र” बताते हुए समर्थन की उम्मीद जताई थी। हालांकि, उस दौरान सपा सांसदों ने सरकार का समर्थन नहीं किया। इसलिए अब पार्टी के बदले रुख को राजनीतिक यू-टर्न के रूप में देखा जा रहा है।
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर समाजवादी पार्टी का बदला रुख राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा का विषय बन गया है
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मंगलवार को महिला संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सपा प्रमुख से मुलाकात की। प्रतिनिधियों ने महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग रखी। इसके बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर महिला भागीदारी बढ़ाने और उच्च सदन में सीट विस्तार का समर्थन किया। इससे पार्टी का संदेश पहले की तुलना में अलग दिखाई दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं को साधना सभी दलों की प्राथमिकता बन गई है। महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी चुनावी रणनीति को प्रभावित कर रही है। ऐसे में समाजवादी पार्टी भी अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश करती दिख रही है।अखिलेश यादव महिला आरक्षण पर बदला रुख आगामी चुनावों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों इस बदलाव को अपने-अपने तरीके से पेश करेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद और चुनावी मैदान में इस मुद्दे का क्या असर पड़ता है।
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