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    CDO

    उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में स्थित एक संस्कृत महाविद्यालय का औचक निरीक्षण कई गंभीर सवाल छोड़ गया। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) राजेश कुमार सिंह जब पांडेचक बरनई स्थित श्री विजय राघव संस्कृत महाविद्यालय पहुंचे तो वहां का दृश्य चौंकाने वाला था। पूरे महाविद्यालय में न तो कोई छात्र मौजूद मिला और न ही कोई शिक्षक दिखाई दिया। निरीक्षण के दौरान केवल एक कर्मचारी मिला, जो कार्यालय में टेबल पर पैर रखकर गहरी नींद में सो रहा था। जांच टीम ने उसके कमरे में पहुंचकर वीडियो भी बनाया, लेकिन कर्मचारी की नींद नहीं खुली। यह पूरा घटनाक्रम अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। इस निरीक्षण ने महाविद्यालय के संचालन और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

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    CDO ने दिए विस्तृत जांच के आदेश

    जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि पूरा संस्कृत महाविद्यालय केवल तीन छोटे कमरों में संचालित हो रहा है। निरीक्षण के समय किसी भी कक्षा में पढ़ाई होती हुई दिखाई नहीं दी। परिसर पूरी तरह सुनसान था और कहीं भी विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज नहीं हुई। अधिकारियों ने महाविद्यालय की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और उपलब्ध संसाधनों का भी जायजा लिया। इस दौरान कर्मचारी का कार्यालय में सोते हुए मिलना जांच का सबसे चर्चित पहलू बन गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि कर्मचारी पंखे के नीचे आराम से सो रहा है, जबकि अधिकारी कमरे में प्रवेश कर निरीक्षण करते रहे। इस घटना ने संस्थान की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    मुख्य विकास अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने निरीक्षण के बाद संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पूछा कि यदि यह सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान है तो नियमित पढ़ाई क्यों नहीं हो रही थी। यदि संस्थान निजी है, तब भी उसके संचालन और मानकों की जांच आवश्यक होगी। सीडीओ ने यह भी जानने के निर्देश दिए कि महाविद्यालय निर्धारित नियमों और मान्यता की शर्तों का पालन कर रहा है या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने संस्थान के रिकॉर्ड, उपस्थिति रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है।

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    शिक्षा व्यवस्था और सरकारी अनुदान पर उठे सवाल

    इस निरीक्षण के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई अहम सवाल सामने आए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि महाविद्यालय नियमित रूप से संचालित हो रहा था तो निरीक्षण के समय छात्र और शिक्षक क्यों अनुपस्थित थे। साथ ही यह भी जांच का विषय बन गया है कि क्या संस्थान वास्तव में शिक्षा प्रदान कर रहा है या केवल कागजों पर संचालित हो रहा है। सरकारी सहायता और अनुदान के उपयोग को लेकर भी प्रशासन ने गंभीरता दिखाई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यह मामला शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

    सीडीओ राजेश कुमार सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि निरीक्षण के दौरान उन्हें केवल तीन छोटे कमरे मिले, जहां एक कर्मचारी गहरी नींद में सो रहा था। उन्होंने कहा कि टीम ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी रिकॉर्ड किया है और अब सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। प्रशासन यह पता लगाएगा कि संस्थान सरकारी है या निजी तथा वहां नियमित शिक्षण कार्य क्यों नहीं हो रहा था। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित नियमों के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और संस्थानों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है, जबकि स्थानीय प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच में जुटा हुआ है।

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    One thought on “CDO के निरीक्षण में खुली संस्कृत महाविद्यालय की पोल, टेबल पर पैर रखकर सोता मिला कर्मचारी”

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