दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व IRS अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल से जुड़े मामले में CBI के छह अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि अधिकारियों ने कोर्ट के सामने तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी पेश की थी। जस्टिस मधु जैन की पीठ ने अशोक कुमार अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें निचली अदालत ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने से इनकार किया था। अदालत ने कहा कि मामले से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड से अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी पर गंभीर सवाल उठते हैं।
कोर्ट ने छह CBI अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद CBI के छह अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने मामले में झूठे जवाब और तथ्य छिपाने के आरोपों को गंभीरता से लिया है। CBI ने पूर्व IRS अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 जनवरी 2016 को इस मामले में CBI की अभियोजन स्वीकृति को अमान्य घोषित कर दिया था। इसके बाद विशेष अदालत ने 10 मार्च 2016 को अशोक अग्रवाल को मामले में बरी कर दिया। बरी होने के बाद अग्रवाल ने CBI के पास जब्त अपने दस्तावेज वापस करने की मांग की। CBI ने 2 अगस्त 2016 को अदालत में जवाब दाखिल किया और कहा कि आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर कानून मंत्रालय तथा संबंधित प्रशासनिक विभाग से बातचीत जारी है।
हालांकि, रिकॉर्ड के मुताबिक कानून मंत्रालय ने 8 जून 2016 को अपनी राय दे दी थी। मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में अपील या SLP दाखिल करने का कोई ठोस आधार नहीं माना था। इस स्थिति के बावजूद CBI ने अदालत के सामने बातचीत लंबित होने की जानकारी दी। इसके बाद अशोक कुमार अग्रवाल ने अधिकारियों के खिलाफ धारा 340 CrPC के तहत कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI अधिकारियों ने अदालत के सामने गलत हलफनामा और गलत जानकारी पेश की। विशेष अदालत ने 25 अक्टूबर 2025 को उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद अग्रवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड और फाइलों की जांच की। अदालत ने पाया कि कानून मंत्रालय ने 8 जून 2016 को अपनी राय पहले ही दे दी थी और SLP दाखिल करने की मांग को स्वीकार नहीं किया था।
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क्या है पूरा मामला?
कोर्ट के मुताबिक, इसके बावजूद CBI के तत्कालीन ज्वाइंट डायरेक्टर विनीत विनायक ने फाइल में मौजूद जानकारी को बदल दिया। उन्होंने आंतरिक ड्राफ्ट में कटिंग करके ऐसा रिकॉर्ड तैयार किया, जिससे संबंधित विभाग के साथ बातचीत जारी होने का दावा सामने आया। अदालत ने इस कार्रवाई को गंभीरता से लिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच के बाद माना कि CBI अधिकारियों ने महत्वपूर्ण तथ्य अदालत से छिपाए और गलत जानकारी पेश की। अदालत ने कहा कि 8 जून 2016 की कानूनी राय अधिकारियों के रिकॉर्ड में मौजूद थी, फिर भी 2 अगस्त 2016 को कोर्ट के सामने अलग स्थिति बताई गई।
सुनवाई के दौरान फाइल में की गई कटिंग का स्क्रीनशॉट भी अदालत के रिकॉर्ड का हिस्सा बना। कोर्ट ने इस मामले में तत्कालीन ज्वाइंट डायरेक्टर विनीत विनायक की भूमिका का भी उल्लेख किया। हाईकोर्ट ने धारा 191, 193 और 209 IPC के तहत लिखित शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के दायरे में छह CBI अधिकारी शामिल हैं। इनमें विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम, सुशील दीवान और मोहम्मद आजाद शामिल हैं। इन अधिकारियों ने उस समय अलग-अलग पदों पर CBI के साथ काम किया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।

