पंजाब के मानसा में समाजसेवी और एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर बहस के दौरान उन पर गोली चलती दिखाई देती है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, परविंदर झोटा नशे से जुड़े एक मामले को लेकर मेडिकल स्टोर पहुंचे थे। वहां मौजूद व्यक्ति के साथ उनकी बहस हुई, जिसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर उन पर फायरिंग कर दी। झोटा लंबे समय से इलाके में नशे के खिलाफ अभियान चला रहे थे और इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखते थे। घटना के बाद पंजाब में नशे के कारोबार और इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस हत्याकांड के संबंध में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है।
पंजाब पुलिस ने शुरू की जांच, कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल
परविंदर झोटा की हत्या ने मानसा में सनसनी फैला दी है। सामने आए वीडियो में दुकान के भीतर विवाद के दौरान गोली चलने की घटना दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, झोटा नशे से संबंधित शिकायत, कथित गतिविधियों को लेकर मेडिकल स्टोर पहुंचे थे। इसी दौरान दुकान पर मौजूद व्यक्ति के साथ उनका विवाद हुआ। इसके बाद कथित तौर पर फायरिंग हुई, जिसमें झोटा की जान चली गई। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और विवाद के कारणों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह मामला व्यापक चर्चा में आ गया है। झोटा मानसा क्षेत्र में नशे के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे। उनकी हत्या ने स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस अब घटना से जुड़े तथ्यों और आरोपों की जांच कर रही है।
मानसा पुलिस ने इस हत्याकांड की जांच शुरू कर दी है। एसएसपी वैभव चौधरी के अनुसार, पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। जांच अधिकारी घटना के कारणों, फायरिंग की परिस्थितियों और इसमें शामिल व्यक्ति की भूमिका जैसे पहलुओं पर ध्यान दे रहे हैं। फिलहाल पुलिस की जांच से जुड़े निष्कर्षों और आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। इस बीच, घटना ने पंजाब में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। विपक्षी नेताओं ने हत्या पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। शिरोमणि अकाली दल, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने इस घटना को लेकर सरकार की नीतियों और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा भी सरकार की जिम्मेदारी है।
Also Read : मां ने जुड़वा बेटियों की हत्या की फिर खुदकुशी की कोशिश; FIR दर्ज
सुखबीर बादल ने सरकार को घेरा, ड्रग्स विरोधी अभियान पर सवाल
शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने परविंदर झोटा की हत्या पर दुख जताया और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि झोटा लगातार नशे के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, लेकिन उनकी शिकायतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। बादल ने इस घटना को पंजाब की कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार की आलोचना की। उन्होंने राज्य सरकार के अभियान ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए। अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी मुख्यमंत्री से जवाब मांगा। उन्होंने दावा किया कि झोटा मेडिकल स्टोर पर हेरोइन की कथित बिक्री का लाइव प्रसारण करते समय निशाने पर आए। मजीठिया ने सवाल किया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा।
भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने परविंदर झोटा की हत्या की निंदा करते हुए पंजाब में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में गैंगस्टरों और नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के हौसले बढ़े हैं। चन्नी ने दावा किया कि झोटा नशे की समस्या को उजागर करने का प्रयास कर रहे थे और उनकी हत्या ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इन आरोपों पर सरकार की प्रतिक्रिया और पुलिस जांच के निष्कर्ष मामले की आगे की दिशा तय करेंगे।

