उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े निवेश घोटाले के कथित मास्टरमाइंड राशिद नसीम को सात साल की फरारी के बाद यूएई में गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच एजेंसियां अब उससे पूछताछ कर रही हैं और उन्हें उम्मीद है कि उसकी भारत वापसी इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल सकती है।
पिछले हफ्ते संयुक्त अरब अमीरात में हुई गिरफ्तारी ने शाइन सिटी घोटाले को फिर सुर्खियों में ला दिया। करीब सात साल तक फरार रहने के बाद नसीम की गिरफ्तारी को इस मामले में बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
अब तक इस मामले में 554 से अधिक एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। पुलिस ने सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया है और अरबों रुपये की कथित हेराफेरी की जांच जारी है। कई राज्यों में फैले रियल एस्टेट नेटवर्क के कारण यह मामला उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े निवेश घोटालों में शामिल हो गया है।
शाइन सिटी ने पहले चरण में निवेशकों का भरोसा कैसे जीता?
जांच एजेंसियां बताती हैं कि आरोपियों ने कथित मॉडस ऑपरेंडी के पहले चरण में भरोसा बनाने पर जोर दिया। कंपनी ने रियल एस्टेट को आधार बनाकर कई निवेश योजनाएं पेश कीं। उसने प्लॉट, फ्लैट, फार्म हाउस और कमर्शियल स्पेस के साथ-साथ ज्वेलरी और लग्जरी गाड़ियों तक के ऑफर दिए। कंपनी ने निवेशकों को तय अवधि में रकम दोगुनी या आकर्षक रिटर्न देने का भरोसा दिलाया।
कंपनी ने शुरुआती निवेशकों को समय पर भुगतान या आंशिक रिटर्न देकर विश्वास मजबूत किया। उसने बड़े सेमिनार और प्रमोशनल इवेंट आयोजित किए और आकर्षक प्रेजेंटेशन के जरिए लोगों को जोड़ा। कंपनी ने एजेंटों को मोटा कमीशन दिया, ताकि वे अपने सामाजिक दायरे से निवेश जुटाएं। कई लोगों ने रिश्तों और स्थानीय भरोसे के आधार पर निवेश किया।
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शाइन सिटी ने कंपनियों का जाल बिछाकर फंड कैसे डायवर्ट किया?
शाइन सिटी ने अपने साथ दर्जनों संबद्ध कंपनियां बनाईं। कंपनी ने कानपुर, दिल्ली और हरियाणा में कई इकाइयों का पंजीकरण कराया। जांच एजेंसियों ने 30 से अधिक संबद्ध कंपनियों और 34 संदिग्ध शेल एंटिटी की पहचान की। आरोप है कि कंपनी ने निवेशकों का पैसा इन कंपनियों के जरिए घुमाया। इससे फंड के स्रोत और अंतिम उपयोग का पता लगाना कठिन हो गया।
कंपनी ने इस धन से जमीन, कमर्शियल प्रॉपर्टी और कृषि भूमि खरीदी। उसने अन्य अचल संपत्तियों में भी निवेश किया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2021 में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। एजेंसी अब तक 266.70 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर चुकी है।
2017 में यूपी में भाजपा सरकार बनने के बाद शिकायतें बढ़ने लगीं। एफआईआर की संख्या भी तेजी से बढ़ी। दबाव बढ़ने पर 2019 में राशिद नसीम के भारत छोड़ने का आरोप लगा। वह पहले नेपाल गया। वहां हिरासत और जमानत के बाद वह दुबई पहुंचा। जांच एजेंसियों का कहना है कि उसने दुबई से नेटवर्क चलाया।
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