श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस साल सिर्फ आस्था और भक्ति का पर्व नहीं, बल्कि कारोबार के लिहाज से भी बड़ा अवसर बनकर सामने आ रही है। देशभर के बाजारों में माखन-मिश्री, दूध-दही, मिठाई, फल, फूल, पूजा सामग्री और सजावटी सामान की मांग तेजी से बढ़ी है। मोर-मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले, श्रृंगार सामग्री और आभूषण भी लोग जमकर खरीद रहे हैं। लंबा वीकेंड होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु मथुरा-वृंदावन, द्वारका और दूसरे कृष्ण तीर्थों की ओर भी रुख कर रहे हैं। इससे धार्मिक पर्यटन से जुड़े कारोबार को भी रफ्तार मिलने की उम्मीद है। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुमान के मुताबिक, इस साल जन्माष्टमी से जुड़े बाजार में 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो सकता है।
जन्माष्टमी पर 40,000 करोड़ के कारोबार का अनुमान
CAIT ने यह अनुमान अलग-अलग व्यापारिक क्षेत्रों में होने वाली संभावित बिक्री, धार्मिक आयोजनों, मंदिरों और तीर्थस्थलों पर होने वाले खर्च तथा धार्मिक पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को ध्यान में रखकर लगाया है। संगठन के अनुसार, जन्माष्टमी पर सबसे ज्यादा खर्च मिठाई, माखन-मिश्री और डेयरी उत्पादों पर हो सकता है, जिनकी हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत रहने का अनुमान है। धार्मिक पर्यटन, होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं पर करीब 15 प्रतिशत खर्च हो सकता है। फूल, मालाएं और सजावट सामग्री करीब 12 प्रतिशत हिस्सेदारी रख सकती हैं। पूजा सामग्री, धूप-अगरबत्ती, पंचामृत और पूजन किट पर 10 प्रतिशत, पारंपरिक परिधान पर 10 प्रतिशत तथा फल, सूखे मेवे और प्रसाद सामग्री पर भी 10 प्रतिशत खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा मूर्तियों, झूलों और श्रृंगार सामग्री पर 8 प्रतिशत, उपहार व खिलौनों पर 5 प्रतिशत और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं पर 10 प्रतिशत खर्च हो सकता है।
CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक, जन्माष्टमी भारतीय संस्कृति, परंपरा और कारोबार को एक साथ जोड़ने वाला बड़ा पर्व है। उन्होंने कहा कि इस त्योहार में लोग पूजा-पाठ के साथ स्थानीय बाजार से बड़ी मात्रा में सामान खरीदते हैं, जिससे छोटे व्यापारियों और स्थानीय कारोबारियों को सीधा फायदा मिलता है। उन्होंने त्योहारों के बाजार में ‘वोकल फॉर लोकल’ के असर का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, ग्राहक अब भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे कारीगरों, हस्तशिल्प कारोबारियों, कुटीर उद्योगों, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों और महिला उद्यमियों को फायदा मिल रहा है। जन्माष्टमी की मांग किसान, दुग्ध उत्पादक, फूल विक्रेता, मिठाई कारोबारी, मूर्तिकार, वस्त्र विक्रेता, ट्रांसपोर्टर, होटल और रेस्तरां संचालकों तक आर्थिक गतिविधि पहुंचाती है।
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मिठाई और डेयरी प्रोडक्ट्स पर सबसे ज्यादा खर्च
आंकड़ों पर नजर डालें तो जन्माष्टमी का कारोबार पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। CAIT के अनुसार, 2024 में जन्माष्टमी पर करीब 25,000 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था। 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 30,000 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस साल संगठन ने करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है और कारोबार 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रहने की उम्मीद जताई है। उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी, वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव, धार्मिक पर्यटन का विस्तार और डिजिटल व आधुनिक रिटेल के बढ़ते इस्तेमाल ने इस वृद्धि को गति दी है। जन्माष्टमी के साथ-साथ देश के दूसरे बड़े त्योहार भी छोटे व्यापारियों, किसानों, कारीगरों और सेवा क्षेत्र के लिए आय और रोजगार के नए अवसर पैदा करते हैं।
इस बार मथुरा-वृंदावन, द्वारका, नाथद्वारा, दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद और इंदौर समेत देश के प्रमुख कृष्ण मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में लोग जन्माष्टमी को बड़े उत्साह के साथ मना रहे हैं। श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से होटल, परिवहन, रेस्तरां, प्रसाद, फूल, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं में कारोबार बढ़ सकता है। CAIT का मानना है कि ऐसे त्योहार भारत की जमीनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, क्योंकि बाजार में खर्च किया गया पैसा अलग-अलग वर्गों तक आय और रोजगार के रूप में पहुंचता है। इस तरह जन्माष्टमी भक्ति के साथ बाजार, परंपरा के साथ रोजगार और स्थानीय खरीदारी के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी गति देने वाला पर्व बन जाती है।


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