महाराष्ट्र सरकार ने सर्पदंश यानी Snake Bite को पूरे राज्य में Notified Disease (अधिसूचित बीमारी) घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों को सर्पदंश के हर संदिग्ध, संभावित और पुष्ट मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य होगा। मरीज की मौत होने पर अस्पतालों को उसकी भी रिपोर्ट करनी होगी। सरकार इस व्यवस्था के जरिए सर्पदंश के मामलों पर व्यवस्थित नजर रखना चाहती है, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके और किसी भी इलाके में एंटी स्नेक वेनम (ASV) की कमी न हो। ग्रामीण, आदिवासी और जंगलों के आसपास रहने वाले क्षेत्रों में सर्पदंश का खतरा अधिक रहता है, इसलिए यह कदम इन इलाकों के लिए खास महत्व रखता है।
Also read:सुकेश चंद्रशेखर का नया दावा, केजरीवाल और सत्येंद्र जैन को दी 3 और घोटाले खोलने की चेतावनी
हर सर्पदंश केस की होगी डिजिटल रिपोर्टिंग
नए नियम के तहत डॉक्टर और स्वास्थ्य संस्थान सर्पदंश से जुड़े मामलों का डेटा अपने जिले के डिस्ट्रिक्ट हेल्थ ऑफिसर या डिस्ट्रिक्ट सिविल सर्जन को भेजेंगे। स्वास्थ्य विभाग इस जानकारी को डिजिटल सिस्टम के जरिए दर्ज और ट्रैक करेगा। रिपोर्ट में मरीज को दी गई एंटी स्नेक वेनम की मात्रा, इलाज के बाद उसकी स्थिति, अस्पताल से दूसरे केंद्र पर रेफर करने की जरूरत और अस्पताल में उपलब्ध ASV स्टॉक जैसी जानकारियां शामिल होंगी। सरकार इस डिजिटल निगरानी से यह पता लगा सकेगी कि किन क्षेत्रों में सर्पदंश के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं और किन अस्पतालों को अतिरिक्त दवाओं की जरूरत है। इससे स्वास्थ्य विभाग जरूरत के मुताबिक एंटी वेनम की आपूर्ति को तेजी से व्यवस्थित कर सकेगा।
सरकार ने इस पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी अलग-अलग स्तरों पर तय की है। राज्य स्तर पर संबंधित अधिकारी निगरानी करेंगे, जबकि जिलों में सिविल सर्जन और स्वास्थ्य अधिकारी मामलों की रिपोर्टिंग और दवाओं की उपलब्धता पर नजर रखेंगे। नगर निगम क्षेत्रों में मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ इस व्यवस्था को संभालेंगे। अस्पतालों को एंटी वेनम के स्टॉक का नियमित और रियल-टाइम रिकॉर्ड भी रखना होगा। स्वास्थ्य विभाग इस डेटा का विश्लेषण करके यह समझेगा कि साल के किस मौसम, महीने या इलाके में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ती हैं। इसके आधार पर सरकार प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चला सकती है और पहले से डॉक्टरों, दवाओं तथा जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था कर सकती है।
Also read:‘मैं डूबा हुआ नहीं, उलझा हुआ हूं’, 25-30 करोड़ के बकाये पर बोले राजपाल यादव
मौसम और इलाके के हिसाब से बनेगी रणनीति
सर्पदंश को Notified Disease घोषित करने की मांग विधानसभा में भी उठ चुकी थी। बीजेपी विधायक विक्रम पाचपुते ने सर्पदंश के मामलों, मौतों और इलाज के परिणामों की अनिवार्य निगरानी की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने सरकारी Haffkine Institute को पूरी क्षमता के साथ दोबारा सक्रिय करने की मांग भी रखी है। इसके अलावा उन्होंने महाराष्ट्र में क्षेत्रीय स्तर पर एंटी वेनम बैंक बनाने और अलग-अलग सांपों की प्रजातियों के जहर के अनुसार अधिक प्रभावी उपचार विकसित करने की जरूरत बताई। उनका तर्क है कि अलग-अलग क्षेत्रों में पाए जाने वाले सांपों के जहर में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय जरूरतों के मुताबिक उपचार व्यवस्था तैयार करना मरीजों के लिए अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।
सर्पदंश के इलाज में शुरुआती समय को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से विशेषज्ञ और नीति-निर्माता ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान मरीज को सही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दे रहे हैं। सरकार की नई निगरानी व्यवस्था से न केवल मामलों का रिकॉर्ड बेहतर होगा, बल्कि दवाओं की उपलब्धता और इलाज के परिणामों पर भी नजर रखी जा सकेगी। वहीं, तेजी से जहर की पहचान करने वाली तकनीक और बेहतर डायग्नोस्टिक सुविधाओं पर जोर देने से डॉक्टरों को सही उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है। महाराष्ट्र सरकार का यह कदम सर्पदंश को केवल व्यक्तिगत चिकित्सा समस्या के बजाय एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में देखने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है।
Also read: लखनऊ में ट्रिपल मर्डर से हड़कंप, पत्नी और बहन की हत्या के बाद पति ने की खुदकुशी

