मंत्रिमंडल फेरबदल 2026 की चर्चा उस समय और तेज हो गई जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सभी केंद्रीय मंत्रियों से विस्तृत रिपोर्ट कार्ड मांगा। 24 फरवरी को ‘सेवा तीर्थ’ में हुई कैबिनेट बैठक लगभग तीन घंटे चली। बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई और दोपहर करीब 2 बजे समाप्त हुई। मंत्रियों को 2024 से अब तक के काम का संक्षिप्त सार 2 मार्च तक कैबिनेट सचिवालय में जमा करना है। चूंकि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे करने के करीब है, इसलिए इस कदम को मंत्रिमंडल फेरबदल 2026 से जोड़कर देखा जा रहा है।
मंत्रिमंडल फेरबदल 2026: रिपोर्ट में मांगे गए ठोस आंकड़े
सबसे पहले, मंत्रालयों को चार श्रेणियों में जानकारी देनी होगी। इनमें विधायी, नीतिगत, नियमावली और प्रशासनिक सुधार शामिल हैं। हर मंत्रालय को बताना होगा कि 2024 से अब तक कितने नए विधेयक लाए गए या संशोधन किए गए। इसके अलावा, कितनी प्रक्रियाएं सरल की गईं और कितनी सेवाएं ऑनलाइन हुईं।साथ ही, सुधारों का मापनीय असर भी देना होगा। उदाहरण के तौर पर, फाइल निपटान का समय कितने प्रतिशत घटा। कितने लाख या करोड़ लोगों को लाभ मिला। कितनी वित्तीय बचत हुई। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ में क्या सुधार आया। इससे स्पष्ट है कि मंत्रिमंडल फेरबदल 2026 से पहले प्रदर्शन का आंकड़ों के आधार पर मूल्यांकन होगा।
‘सेवा तीर्थ’ बैठक और 140 करोड़ नागरिकों का संदर्भ
बैठक में नियमित प्रस्तावों के बाद सुधारों की गति बढ़ाने पर चर्चा हुई। इस दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्री Ashwini Vaishnaw ने ‘सेवा संकल्प प्रस्ताव’ पढ़ा। प्रस्ताव में 140 करोड़ नागरिकों की सेवा, पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया गया।सूत्रों के अनुसार, बैठक के तुरंत बाद कई मंत्रियों ने अपने सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें कीं। लक्ष्य स्पष्ट है—रिपोर्ट समय पर और ठोस डेटा के साथ जमा हो।
2021 का उदाहरण और संभावित असर
दरअसल, 2021 में भी दूसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने पर इसी तरह रिपोर्ट कार्ड मांगा गया था। जुलाई 2021 में हुए फेरबदल में दर्जन से अधिक मंत्रियों के विभाग बदले गए थे। कई नए चेहरों को शामिल किया गया था।अब जब तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने वाले हैं, तब मंत्रिमंडल फेरबदल 2026 की संभावना पर चर्चा स्वाभाविक है। हालांकि अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मई या जून में बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसलिए आने वाले हफ्तों में जमा होने वाला यह रिपोर्ट कार्ड राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
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