• Tue. Sep 22nd, 2026

    क्या पंजाब में बीजेपी और अकाली दल फिर आएंगे साथ? सुखबीर बादल की पीएम मोदी से मुलाकात ने बढ़ाई गठबंधन की अटकलें

    पंजाब

    पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लंबे समय तक साथ चुनाव लड़ने वाली बीजेपी और अकाली दल ने 2020 में किसान आंदोलन के दौरान अपनी 25 साल पुरानी साझेदारी खत्म कर दी थी। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात को संभावित राजनीतिक समीकरणों के नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, किसी भी दल ने गठबंधन को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले इस मुलाकात ने सियासी हलचल जरूर बढ़ा दी है।

    Also read:पद्मश्री रेमो फर्नांडिस ने लाइव कॉन्सर्ट्स से दूरी बनाने का किया ऐलान, बताई वजह

    कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर हुई चर्चा

    मुलाकात के बाद सुखबीर सिंह बादल ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ पंजाब की कानून-व्यवस्था, राज्य सरकार की योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार और प्रदेश से जुड़े अन्य अहम मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने बैठक के विस्तृत एजेंडे का खुलासा नहीं किया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी ओर, बीजेपी, अकाली दल और कांग्रेस लगातार भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरते रहे हैं। ऐसे माहौल में दोनों नेताओं की बातचीत ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि क्या बीजेपी और अकाली दल आगामी चुनाव में एक बार फिर साथ आ सकते हैं।

    बीजेपी और अकाली दल ने करीब ढाई दशक तक पंजाब में गठबंधन के तहत चुनाव लड़े और दोनों दलों को इसका राजनीतिक लाभ भी मिला। हालांकि, 2020 में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुए किसान आंदोलन ने इस रिश्ते को खत्म कर दिया। ग्रामीण और किसान वोटबैंक को ध्यान में रखते हुए अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग होने का फैसला लिया। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दल अलग-अलग मैदान में उतरे और अपनी राजनीतिक ताकत का आकलन किया। अब 2027 के चुनाव नजदीक आते ही दोनों दलों के रिश्तों को लेकर फिर अटकलें तेज हो गई हैं।

    Also read:ब्रिटेन से भारत लौटेगी वाग्देवी की दुर्लभ प्रतिमा, सरकार ने तेज किए कूटनीतिक प्रयास

    किसान आंदोलन के बाद टूटा था 25 साल पुराना गठबंधन

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस जैसी मजबूत राजनीतिक ताकतों के सामने बीजेपी और अकाली दल के लिए पुराने सामाजिक और चुनावी समीकरणों को दोबारा मजबूत करना फायदेमंद हो सकता है। पहले शहरी क्षेत्रों में बीजेपी और ग्रामीण इलाकों में अकाली दल एक-दूसरे के पूरक माने जाते थे। हिंदू और सिख मतदाताओं का यह संतुलन लंबे समय तक गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत रहा। इसलिए कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि दोनों दल सत्ता में वापसी की मजबूत चुनौती पेश करना चाहते हैं, तो उन्हें एक-दूसरे के सहयोग की जरूरत पड़ सकती है।

    फिलहाल बीजेपी ने पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी का संकेत दिया है और संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। वहीं, सुखबीर सिंह बादल भी सार्वजनिक रूप से पार्टी को मजबूत करना अपनी प्राथमिकता बताते रहे हैं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात ने यह संदेश जरूर दिया है कि पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। राज्य में करीब पांच महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में आने वाले समय में राजनीतिक दलों की रणनीतियां और संभावित गठबंधन चुनावी माहौल को नया मोड़ दे सकते हैं।

    Also read:हिमाचल में मानसून का कहर जारी, 142 लोगों की मौत, 797 करोड़ का नुकसान; 11 अगस्त तक भारी बारिश का अलर्ट

    Share With Your Friends If you Loved it!