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    गिरावट

    आज शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। फ्रंटलाइन इंडेक्स BSE Sensex और Nifty 50 दोनों भारी दबाव में रहे। बीएसई सेंसेक्स 1300 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 करीब 1.3% गिरकर 25,387 पर बंद हुआ। बिकवाली सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी लगभग 1% तक की गिरावट देखने को मिली। इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में करीब 6.3 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 469 लाख करोड़ रुपये से घटकर 462 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।

    अमेरिका से जुड़ी अनिश्चितता ने बढ़ाया दबाव

    बाजार में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका से जुड़े घटनाक्रम रहे। हाल ही में Supreme Court of the United States ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के टैरिफ फैसले को रद्द कर दिया। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने और आक्रामक रुख अपनाने के संकेत दिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट के सेक्शन 232 के तहत नए सिरे से टैरिफ लगाने की तैयारी चल रही है। साथ ही, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन पर वैश्विक बाजारों की नजर टिकी हुई है। निवेशकों को आशंका है कि यदि अमेरिका सख्त टैरिफ नीति अपनाता है तो ग्लोबल ट्रेड और उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।

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    अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता

    अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी। ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों और सरकार की सख्त कार्रवाई से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका ने ईरान को सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच 26 फरवरी को प्रस्तावित परमाणु वार्ता से पहले अनिश्चितता और गहरा गई है। भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखा।

    आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली

    आईटी सेक्टर की तेज गिरावट ने बाजार को और कमजोर कर दिया। Nifty IT इंट्राडे में करीब 4% तक गिर गया और फरवरी में अब तक लगभग 20% टूट चुका है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव, अमेरिकी ब्याज दरों के ऊंचे स्तर और आईटी कंपनियों के एडीआर में कमजोरी से निवेशकों ने लगातार बिकवाली की। आईटी शेयरों में गिरावट से सेंसेक्स और निफ्टी पर सीधा दबाव पड़ा, क्योंकि इन इंडेक्स में आईटी कंपनियों का बड़ा वेटेज है।

    कच्चे तेल और डॉलर की मजबूती का असर

    ग्लोबल संकेत भी बाजार के लिए नकारात्मक रहे। Brent Crude 72 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो छह महीने के उच्च स्तर के करीब है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ाता है। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में मजबूती से विदेशी निवेशकों का रुख प्रभावित हो सकता है। हाल के दिनों में एफआईआई ने खरीदारी की थी, लेकिन डॉलर मजबूत रहने पर पूंजी का बहिर्वाह बढ़ने की आशंका है। ऊंचे वैल्यूएशन और कमजोर कमाई ग्रोथ के बीच बाजार में फिलहाल उतार-चढ़ाव जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।

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