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    शुभेंदु अधिकारी के पीए की हत्या पर बीजेपी-टीएमसी आमने-सामने

    Suvendu Adhikari

    पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के नेता और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की बुधवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना मध्यमग्राम में हुई, जो कोलकाता के पास स्थित है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घायल चंद्रनाथ रथ को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। जिस गाड़ी में वे सवार थे, उस पर विधानसभा पास का स्टिकर लगा था।

    भारतीय जनता पार्टी ने इस हत्या को सुनियोजित साज़िश बताया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने घटना की निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    हालिया विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को करीब 15 हजार वोटों से हराया था। चुनाव नतीजों के बाद राज्य में हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं की आशंका जताई जा रही थी। कई घटनाओं के सामने आने के बाद बीजेपी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता पहचान बदलकर हिंसा फैला रहे हैं।

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    सिद्ध नाथ गुप्ता ने बताया कि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और वारदात में इस्तेमाल हुई गाड़ी को ज़ब्त कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि गाड़ी पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थी और घटनास्थल से ज़िंदा कारतूस भी बरामद हुए हैं। पुलिस चश्मदीदों के बयान और जुटाए गए सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

    वहीं शुभेंदु अधिकारी ने चंद्रनाथ रथ की हत्या को सुनियोजित साज़िश बताया। उन्होंने दावा किया कि वारदात से 2-3 दिन पहले रेकी की गई थी। अधिकारी ने इस घटना को तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के “महाजंगल राज” का परिणाम करार दिया।

    शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पार्टी इस घटना से गहरे सदमे में है और केंद्रीय नेतृत्व लगातार मामले पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने पीड़ित परिवार और पुलिस अधिकारियों से बात की है।

    दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने बयान जारी कर मध्यमग्राम में चंद्रनाथ रथ की हत्या की निंदा की। पार्टी ने चुनाव बाद हिंसा में तीन टीएमसी कार्यकर्ताओं की हत्या का भी मुद्दा उठाया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    टीएमसी ने अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि राजनीतिक हिंसा और हत्याओं की लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है। पार्टी ने दोषियों की जल्द पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाने की मांग की।

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