नगालैंड सरकार ने पूर्वी जिलों में शिक्षकों की कमी को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाया। मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने बुधवार को आपात बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें पूर्वी जिलों के विधायक, शिक्षा विभाग के अधिकारी और मंत्री शामिल हुए। बैठक में रेशनलाइजेशन पॉलिसी के तहत ट्रांसफर किए गए 33 शिक्षकों को उनके मूल जिलों में वापस भेजने का निर्णय लिया गया। यह फैसला हजारों छात्रों की पढ़ाई में आ रही रुकावट को दूर करने के उद्देश्य से लिया गया।
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शिक्षकों की बहाली और नई नियुक्तियां
बैठक में बताया गया कि पूर्वी जिलों में 606 सरकारी स्कूल, 45,174 छात्र और 4,733 शिक्षक मौजूद हैं। डीआईएसई 2024-25 के अनुसार छात्र-शिक्षक अनुपात 10:1 है। सरकार ने आदेश दिया कि हिंदी, गणित और विज्ञान के वे सभी शिक्षक, जिन्हें अन्य जिलों में तैनात किया गया था, उन्हें भी वापस लाया जाएगा। साथ ही सरकार ने तय किया कि भविष्य में भर्ती होने वाले गणित और विज्ञान शिक्षकों की सीधी पोस्टिंग पूर्वी जिलों में की जाएगी। जरूरत पड़ने पर खाली पदों को संबंधित विषय शिक्षकों के पदों में परिवर्तित करने पर भी विचार किया जाएगा।सरकार ने यह भी निर्णय लिया कि आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय समुदायों की मदद से अस्थायी रूप से शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी।
पूर्वी नगालैंड छात्र संघ (ENSF) ने सोमवार को आंदोलन शुरू किया था, जिसके तहत मों, तुएनसांग, किफिरे, लोंगलेनग, नोकलाक और शामाटोर जिलों के स्कूलों और सरकारी कार्यालयों को बंद रखा गया। ENSF का आरोप था कि शिक्षक रेशनलाइजेशन पॉलिसी की वजह से कई स्कूलों में विषय-विशेष शिक्षक की भारी कमी हो गई है। सरकार के त्वरित हस्तक्षेप और बैठक में लिए गए निर्णयों के बाद शिक्षा विभाग ने ENSF से आंदोलन रोकने का आग्रह किया। ENSF ने सरकार की पहल स्वीकार करते हुए तुरंत आंदोलन स्थगित कर दिया और 20 सितंबर को होने वाली बैठक में भाग लेने का आश्वासन दिया।
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