• Fri. Mar 6th, 2026
    राफेल

    देश की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। परिषद ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों और भारतीय नौसेना के लिए 6 P-8I पोसीडॉन समुद्री निगरानी विमानों की खरीद को मंजूरी दी है। यह रक्षा सौदा भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीद योजनाओं में से एक माना जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये है। इस फैसले से भारतीय सेनाओं की ताकत में और इजाफा होगा और भारत की सुरक्षा व्यवस्था को और भी सुदृढ़ किया जाएगा।

    Also Read: आख़िर क्यों बढ़ रही हैं दुनिया भर में शॉपलिफ्टिंग की घटनाएं

    इस महत्वपूर्ण रक्षा सौदे का सबसे अहम पहलू वायुसेना की गिरती स्क्वाड्रन संख्या को संभालना है। 114 नए राफेल विमानों की खरीद के बाद भारतीय वायुसेना को 6 से 7 नए स्क्वाड्रन मिलेंगे, जो वायुसेना की क्षमता को और मजबूत करेंगे। वर्तमान में वायुसेना के पास करीब 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि भारत की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है। इस रक्षा सौदे की डीएसी से मंजूरी मिलने के बाद, अब इसे अंतिम स्वीकृति के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाएगा। इस कदम से भारतीय वायुसेना की ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी और देश की सुरक्षा को और सुदृढ़ किया जाएगा।

    नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता होगी और मजबूत

    भारत की समुद्री निगरानी क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने नौसेना के बेड़े में 6 नए P-8I विमानों को शामिल करने की मंजूरी दी है। भारतीय नौसेना पहले से ही 12 P-8I विमान संचालित कर रही है, जो समुद्री सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। इन नए विमानों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री निगरानी की क्षमता में भारी वृद्धि होगी और साथ ही पनडुब्बी रोधी (एंटी सबमरीन) क्षमता को भी और अधिक मजबूती मिलेगी। यह कदम भारतीय नौसेना की रणनीतिक ताकत को बढ़ाते हुए, समंदर में सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण बढ़ावा देगा।

    Also Read: 10 साल की उम्र में कमाल: ₹300 का डोमेन बना करोड़ों की कहानी

    Share With Your Friends If you Loved it!