हिंदी की वरिष्ठ कथाकार Mamata Kalia को वर्ष 2025 के Sahitya Akademi Award से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। उन्हें यह पुरस्कार उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए दिया जाएगा। Sahitya Akademi की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त 24 भारतीय भाषाओं में हर साल साहित्य अकादमी पुरस्कार दिए जाते हैं। इस बार पुरस्कारों में कविता, उपन्यास, कहानी, निबंध, साहित्यिक आलोचना, आत्मकथा और संस्मरण जैसी विभिन्न विधाओं की पुस्तकें शामिल हैं। अकादमी के अनुसार, Sahitya Akademi Award 2025 की चयन प्रक्रिया जनवरी 2025 में शुरू हुई थी और 30 जनवरी को इसके लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी किया गया था।
Mamata Kalia ने Sahitya Akademi Award की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर अपनी खुशी जाहिर की। फेसबुक पर लिखे संदेश में उन्होंने सभी को धन्यवाद देते हुए कहा कि इतने संदेश और फोन आ रहे हैं कि उनका फोन मानो “ट्रैफिक जाम” से भर गया है। उन्होंने पाठकों के प्यार और शुभकामनाओं के लिए आभार जताया और कहा कि यही स्नेह उन्हें नई किताब लिखने के लिए प्रेरित करता है। Sahitya Akademi के अनुसार, पुरस्कार विजेताओं को 31 मार्च 2026 को New Delhi में आयोजित एक भव्य समारोह में सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर विजेता लेखकों को उत्कीर्ण ताम्रफलक, शॉल और एक लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी।
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‘जीते जी इलाहाबाद’ में ममता कालिया की यादों का सफर
‘जीते जी इलाहाबाद’ Mamata Kalia का एक संस्मरण है, जिसमें उन्होंने Allahabad में बिताए अपने शुरुआती दिनों की यादों को संजोया है। इस पुस्तक में लेखिका ने रानीमंडी के अपने घर, लोकनाथ की मशहूर स्वादिष्टियों और चौक सहित पुराने शहर के कई इलाकों का जीवंत चित्रण किया है। इसके साथ ही उन्होंने उस दौर के साहित्यिक माहौल, लेखकों की जीवनशैली और उनके तौर-तरीकों को भी अपने अनुभवों के जरिए विस्तार से प्रस्तुत किया है। किताब में शहर की सांस्कृतिक पहचान और उस समय के सामाजिक परिवेश की भी झलक मिलती है। अपने सहज और रोचक अंदाज में लेखिका ने इलाहाबाद की यादों को पाठकों के सामने जीवंत कर दिया है।
अपने संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ में Mamata Kalia ने एक रोचक प्रसंग का जिक्र किया है। वह लिखती हैं कि Hindustani Academy की एक गोष्ठी में Markandey Katju अध्यक्षता कर रहे थे। कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में उन्होंने Munshi Premchand को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिस पर सभागार में मौजूद लोगों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। किताब के अनुसार, इसी दौरान भैरव जी नाम के एक व्यक्ति ने कड़ा विरोध जताते हुए मंच की ओर बढ़कर नाराज़गी प्रकट की। स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद Markandey Katju मंच से उतरकर जल्दी से बाहर चले गए, जबकि उनका अर्दली जूते लेकर पीछे-पीछे दौड़ता दिखाई दिया। इस घटना से सभा में मौजूद लोग कुछ समय के लिए स्तब्ध रह गए।
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