बसपा प्रमुख मायावती ने आरक्षण सुधार आंदोलन पर पहली प्रतिक्रिया देते हुए इसके समर्थकों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संविधान प्रदत्त एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण के खिलाफ गतिविधियां देशहित में उचित नहीं हैं। मायावती ने कहा कि सदियों से जातिगत भेदभाव झेल रहे समुदायों को संविधान ने आरक्षण अधिकार दिया। उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए जातिवाद त्यागने की अपील की। मायावती ने कहा कि जातिवाद छोड़ना ही सच्ची देशभक्ति का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है। उन्होंने आर्थिक आधार पर आरक्षण मांगने वालों से पहले मौजूदा व्यवस्था समझने की अपील भी की। मायावती ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण व्यवस्था देश में पहले से ही लागू है। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि इसका लाभ गरीब सवर्ण परिवारों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंचता।
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जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर मायावती का कांग्रेस पर गंभीर आरोप
उन्होंने इसके लिए भ्रष्टाचार, प्रशासनिक कमियों और सरकारी व्यवस्था की खामियों को प्रमुख जिम्मेदार बताया। मायावती ने कहा कि सरकारें गरीबी हटाने के लिए हर वर्ष बड़ी रकम खर्च करती हैं। लेकिन भ्रष्टाचार के कारण सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ जरूरतमंद गरीब परिवारों तक नहीं पहुंचता है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक आरक्षण प्रावधान भी सरकारी तंत्र की लापरवाही से प्रभावी नहीं हो पाए। मायावती ने कहा कि स्वतंत्रता के वर्षों बाद भी वंचित समुदाय गरीबी और भेदभाव झेलते हैं। उन्होंने एससी, एसटी और ओबीसी समाज के लोगों के शोषण तथा अत्याचार पर चिंता जताई।
मायावती ने सभी सरकारों से आरक्षण विरोधी तत्वों को किसी प्रकार का संरक्षण नहीं देने को कहा। उन्होंने राजनीतिक दलों से आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सस्ती राजनीति से बचने की अपील की। मायावती ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पीड़ित व्यक्ति की एफआईआर मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। मायावती ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी दलितों और वंचित वर्गों का संवैधानिक आरक्षण समाप्त करने की मांग कर रहे थे। मायावती ने इसे कांग्रेस की आरक्षण विरोधी मानसिकता का स्पष्ट संकेत बताया और सवाल उठाए।
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