राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान और क्यूबा पर कड़े बयान दिए। उनके भाषण के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने सभा कक्ष से बाहर निकलना चुना। ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते और सैन्य कार्रवाई के बीच विकल्प सामने रखा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ समझौता करके पुनर्निर्माण का रास्ता खोल सकता है। ट्रंप ने विकल्प बताते हुए इस्लामिक रिपब्लिक को तेजी से खत्म करने की चेतावनी दी। उन्होंने ईरान से जुड़ी मौजूदा स्थिति को अपने संबोधन का प्रमुख विषय भी बनाया। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के साथ समझौते की संभावना को खुला भी रखेंगे।
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ट्रंप के भाषण पर ईरान-क्यूबा प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
उन्होंने अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद संभावित समझौते की उम्मीद स्पष्ट रूप से जताई थी। इस बीच ईरानी प्रतिनिधियों ने ट्रंप के भाषण के दस मिनट बाद निकलना शुरू किया। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कक्ष में मौजूद नहीं थे। उनकी जगह ईरान के जूनियर अधिकारी और अन्य आधिकारिक प्रतिनिधि निर्धारित सीटों पर बैठे थे। ट्रंप ने अपने भाषण में क्यूबा की राजनीतिक व्यवस्था और मौजूदा परिस्थितियों पर टिप्पणी की।
उन्होंने क्यूबा को विफल राज्य बताया और वहां जल्द आजादी आने का दावा भी किया। ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन क्यूबा की स्थिति में बुनियादी बदलाव चाहता है। उन्होंने दावा किया कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर पहले से अधिक दबाव बना है। ट्रंप ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को क्यूबा के साथ बातचीत संभालने की जिम्मेदारी बताई। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत पहले ही काफी आगे बढ़ चुकी है। ट्रंप ने अमेरिका के दरवाजे पर विदेशी विरोधियों को ठिकाना नहीं देने की बात कही। इन टिप्पणियों के बाद क्यूबा के प्रतिनिधियों ने महासभा की कार्यवाही से बाहर निकलना चुना। ट्रंप के भाषण ने ईरान और क्यूबा पर अमेरिकी नीति के प्रमुख रुख स्पष्ट किए।
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