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    बजट

    वित्त विभाग ने उत्तर प्रदेश के लिए मध्यकालिक राजकोषीय पुनःसंरचना नीति 2025 जारी की है, जिसके अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश का कुल बजट 9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इसके बाद, 2027-28 में बजट 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने की संभावना है, और 2028-29 तक यह 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। इस तरह अगले तीन वर्षों में हर साल एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि का अनुमान है। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य 2029-30 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 10 खरब रुपये तक पहुंचाना है, और इसके लिए निवेश बढ़ाने और तेज विकास सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। विभागीय तैयारियां इस दिशा में तेजी से चल रही हैं।

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    प्रस्तावित शीतकालीन सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार 2025-26 के पहले अनुपूरक बजट को विधानमंडल में पेश करने की तैयारी कर रही है, और इसका अंतिम आकार सरकार द्वारा निर्धारित किया जाएगा। विभागों ने अपनी मौजूदा योजनाओं को पूरा करने और अतिरिक्त बजट की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वित्त विभाग को विभिन्न प्रस्ताव भेजने शुरू कर दिए हैं। इन प्रस्तावों के तहत अतिरिक्त बजट की मांग की गई है, ताकि योजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके। अनुपूरक बजट पेश होने के बाद, चालू वित्तीय वर्ष का कुल बजट 808736.06 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा, जो राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा।

    UP शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर से एसआईआर पर हंगामा संभव

    उत्तर प्रदेश विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर से शुरू होकर 24 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को संपन्न कराएगी। मंगलवार को कैबिनेट ने इस सत्र से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी। सत्र के दौरान सरकार चालू वित्तीय वर्ष का पहला अनुपूरक बजट भी पेश कर सकती है। इसके अलावा, चुनाव आयोग द्वारा आयोजित मतदाता गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दलों और भाजपा के बीच तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि इस मुद्दे पर विपक्षी दल भाजपा पर लगातार हमलावर रहे हैं।

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