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    अमेरिका

    अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में पूरे मिडिल ईस्ट में हमले तेज किए। इसके बाद ईरान ने क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों से सीधे निशाना बनाया। हालांकि अमेरिका ने पहले अपनी सैन्य ताकत और एयर डिफेंस सिस्टम पर पूरा भरोसा जताया था। लेकिन एक सप्ताह बाद हालात बदलते दिखे और संघर्ष का असर क्षेत्र में फैलने लगा। दरअसल शुरुआती हमलों में ईरान ने अमेरिकी रक्षा व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश की। इसी बीच रिपोर्ट सामने आई कि शक्तिशाली THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा। इस तरह ईरान के हमलों ने अमेरिका की रक्षा रणनीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।

    इसी दौरान एक रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर हमले की विस्तृत जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक जॉर्डन में तैनात अमेरिकी THAAD मिसाइल बैटरी के रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया। इसके परिणामस्वरूप रडार सिस्टम बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसकी क्षमता प्रभावित हुई। हालांकि यह हमला अकेला नहीं था बल्कि अन्य स्थानों पर भी हमलों की खबरें आईं। इसी क्रम में संयुक्त अरब अमीरात के कुछ सैन्य ठिकानों के पास संदिग्ध हमले दर्ज हुए। हालांकि वहां हुए नुकसान की पूरी जानकारी अभी तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई। फिर भी इन घटनाओं ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

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    अमेरिका के THAAD मिसाइल डिफेंस को ईरान के हमले से भारी नुकसान

    दरअसल मिसाइल डिफेंस सिस्टम में रडार को सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। क्योंकि यही रडार दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक करके उन्हें रोकने में मदद करता है। इसके जरिए इंटरसेप्टर मिसाइलें सही समय पर लक्ष्य की ओर दागी जाती हैं। वहीं अमेरिका वर्तमान में दुनिया भर में आठ THAAD बैटरियां संचालित करता है। इनमें से दो संयुक्त अरब अमीरात और एक सऊदी अरब के पास तैनात है। जिस बैटरी पर हमला हुआ वह जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर मौजूद थी।
    यह सैन्य अड्डा ईरान से लगभग आठ सौ किलोमीटर से भी अधिक दूरी पर स्थित है।

    विशेषज्ञों के अनुसार रडार को नुकसान पहुंचना किसी भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ा झटका होता है। हालांकि इससे पूरा THAAD सिस्टम बंद नहीं होता लेकिन उसकी क्षमता जरूर कम हो जाती है। दरअसल AN/TPY-2 रडार को इस सिस्टम का सबसे अहम और महंगा हिस्सा माना जाता है। मिसाइल डिफेंस एजेंसी के बजट के अनुसार इसकी कीमत लगभग पांच सौ मिलियन डॉलर है। इसी कारण इस उपकरण के नष्ट होने से अमेरिका को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि रडार को तुरंत बदलना आसान नहीं होता। इसलिए नई यूनिट तैनात करने में समय लगेगा और तब तक सुरक्षा क्षमता प्रभावित रहेगी।

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