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    300 करोड़ ट्रेडिंग स्कैम छोटी गलती से खाली हो सकता है अकाउंट पुलिस की चेतावनी

    ट्रेडिंग स्कैम

    इन दिनों ट्रेडिंग स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में दिल्ली पुलिस ने 300 करोड़ रुपये के बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और इंटरनेशनल साइबर नेटवर्क के जरिए हजारों लोगों को निशाना बना रहा था। पुलिस ने इस रैकेट के मास्टरमाइंड को भी गिरफ्तार कर लिया है और नेटवर्क के विदेशों तक फैले तारों की जांच जारी है। देशभर से इस मामले में 2000 से ज्यादा शिकायतें सामने आई हैं।

    जांच में पता चला है कि आरोपी ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट के नाम पर लोगों को लुभाते थे। वे फर्जी ऐप और वेबसाइट बनाकर हाई रिटर्न का लालच देते थे। शुरुआत में वे निवेशकों को छोटे-छोटे मुनाफे दिखाकर उनका भरोसा जीतते थे, फिर बड़ी रकम निवेश करवाकर पैसे गायब कर देते थे। ठग सोशल मीडिया, WhatsApp और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से संपर्क करते थे और खुद को इन्वेस्टमेंट एडवाइजर या स्टॉक एक्सपर्ट बताकर भरोसा कायम करते थे।

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    फर्जी प्राइवेट ग्रुप और नकली ट्रेडिंग ऐप से रचते थे जाल

    गिरोह पहले टारगेट को एक प्राइवेट ग्रुप में जोड़ता था, जहां फर्जी यूजर लगातार मुनाफे की बातें करते थे। पूरा सेटअप पहले से तय स्क्रिप्ट के अनुसार चलता था ताकि नए निवेशक को लगे कि बाकी लोग भी अच्छा कमा रहे हैं। भरोसा बनने के बाद आरोपी लिंक भेजकर या ऐप डाउनलोड करवाकर निवेश शुरू करवाते थे। यह ऐप असली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसा दिखता था, लेकिन पूरा सिस्टम ठगों के कंट्रोल में रहता था।

    छोटे मुनाफे का झांसा देकर बड़ी रकम ठगने की चाल

    आरोपी पहले छोटी रकम निवेश करवाते और तुरंत मुनाफा दिखाते थे। कई मामलों में वे थोड़ी रकम निकालने भी देते थे ताकि भरोसा और मजबूत हो जाए। इसके बाद वे बड़ी रकम लगाने के लिए दबाव बनाते थे। जब निवेशक ज्यादा पैसा जमा कर देता, तो ठग टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या रिस्क फंड के नाम पर और पैसे मांगते थे। कई बार वे अकाउंट फ्रीज कर KYC या वेरिफिकेशन के नाम पर अतिरिक्त भुगतान मांगते थे और अंत में प्लेटफॉर्म बंद कर संपर्क तोड़ देते थे।

    मल्टी लेयर ट्रांजैक्शन और कॉल सेंटर मॉडल से छिपाते थे ठगी के पैसे

    पुलिस के मुताबिक आरोपी ठगी की रकम को अलग-अलग खातों, डिजिटल वॉलेट्स, क्रिप्टोकरेंसी और विदेशी खातों में ट्रांसफर कर देते थे, जिससे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। वे फर्जी दस्तावेज और शेल कंपनियों का भी इस्तेमाल करते थे। कई मामलों में गिरोह कॉल सेंटर जैसे सेटअप से ऑपरेट करता था, जहां अलग-अलग लोग एडवाइजर, कस्टमर सपोर्ट और फाइनेंस मैनेजर की भूमिका निभाते थे।

    दिल्ली पुलिस ने इस कार्रवाई के जरिए एक बड़े इंटर-स्टेट साइबर फ्रॉड सिंडिकेट को तोड़ा है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी रखी है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक, ऐप या निवेश ऑफर पर भरोसा न करें। अगर कोई प्लेटफॉर्म ज्यादा मुनाफे का दावा करता है, तो सतर्क रहें। निवेश के लिए केवल आधिकारिक और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें और लालच में आकर किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।

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