दिल्ली शराब घोटाला मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने CBI की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
यह मामला कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़ा था। जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों ने की थी। CBI द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ही ED ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।
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कई महीने जेल में बिताए
जांच के दौरान अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया था। दोनों नेताओं को कई महीनों तक जेल में रहना पड़ा। इस मामले को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में काफी हलचल रही।
हालांकि, अदालत ने अब कहा है कि चार्जशीट में गंभीर खामियां थीं। कोर्ट के अनुसार, आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त गवाह या ठोस सामग्री पेश नहीं की गई।
कोर्ट ने क्या कहा?
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज जितेंद्र सिंह ने आदेश में कहा कि CBI ने बिना ठोस आधार के दोनों नेताओं को आरोपी बनाया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मनीष सिसोदिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता।
इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि अरविंद केजरीवाल को भी पर्याप्त साक्ष्य के बिना फंसाया गया। अदालत ने सभी 23 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया। साथ ही, किसी के खिलाफ भी चार्ज फ्रेम करने से इनकार कर दिया गया।
CBI को फटकार
फैसले के दौरान अदालत ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि जांच में कई कमियां थीं। यह टिप्पणी मामले की दिशा बदलने वाली मानी जा रही है।
राजनीतिक असर
इस फैसले को आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। लंबे समय से चल रहे इस हाई-प्रोफाइल मामले में अदालत का फैसला राजनीतिक तौर पर भी अहम है।


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