• Fri. Oct 9th, 2026
    पेपर

    NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सीबीआई जांच में पता चला है कि गिरफ्तार किए गए NTA के दो सब्जेक्ट एक्सपर्ट सिर्फ प्रश्न तैयार नहीं कर रहे थे। बल्कि, उन्हें प्रश्न पत्र का मराठी में अनुवाद करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। इसी वजह से उन्हें केमिस्ट्री और बायोलॉजी सेक्शन के फाइनल सवालों तक पहुंच मिल गई। अधिकारियों के अनुसार, पुणे की बायोलॉजी एक्सपर्ट मनीषा मांधरे और रिटायर्ड केमिस्ट्री लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि मनीषा मांधरे ने बायोलॉजी के 90 सवालों का अनुवाद किया। वहीं, कुलकर्णी ने केमिस्ट्री के 45 सवालों का मराठी में ट्रांसलेशन किया।

    Also Read: गुजरात जनगणना 2026 की ट्रेनिंग वर्कशॉप में पहुंचा अनचाहा मेहमान, वायरल हुआ वीडियो

    NEET पेपर तैयार करने की प्रक्रिया पर उठे सवाल

    इस तरह दोनों एक्सपर्ट्स को कुल 135 फाइनल सवालों तक एक्सेस मिल गया। इसके अलावा, अधिकारियों का कहना है कि अनुवाद प्रक्रिया ने उन्हें संवेदनशील जानकारी तक पहुंच दिलाई। इसलिए, अब परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, NEET प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में दो स्तर पर अनुवाद होता है। पहले चरण में प्रश्नों को क्षेत्रीय भाषाओं में बदला जाता है। इसके बाद, दूसरे चरण में उनकी जांच के लिए दोबारा अंग्रेजी में अनुवाद किया जाता है। दरअसल, जांच एजेंसियों का मानना है कि इसी प्रक्रिया के दौरान कई लोगों को फाइनल पेपर तक पहुंच मिली। यही वजह है कि पेपर लीक की आशंका और मजबूत हुई है। वहीं, अब NTA की पूरी पेपर-सेटिंग व्यवस्था जांच के दायरे में आ गई है।

    इस बीच, NTA ने संसदीय समिति के सामने दावा किया कि उसके सिस्टम से पेपर लीक नहीं हुआ। हालांकि, परीक्षा से पहले कुछ सवाल वायरल हुए थे। ये सवाल असली प्रश्न पत्र से मेल खा रहे थे। इसलिए, एजेंसी ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। अब NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को होगी। इसके साथ ही, NTA ने CBT मोड और मल्टी-स्टेज एग्जाम जैसे बड़े सुधार लागू करने के संकेत भी दिए हैं।

    Also Read: बंगाल से राजस्थान तक ट्रेन आग की घटनाएं, साजिश का शक

    Share With Your Friends If you Loved it!