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    कांशीराम के नाम पर दलित वोट साधने की कांग्रेस की कोशिश

    कांशीराम

    कांग्रेस ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की जयंती को लेकर राजनीतिक संदेश देने की तैयारी की है। 15 मार्च को कांशीराम की जयंती होती है, लेकिन उससे पहले कांग्रेस ने लखनऊ में बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया। इस कार्यक्रम के जरिए पार्टी दलित समाज को साधने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि कांशीराम की विरासत सामाजिक न्याय की राजनीति से जुड़ी रही है। इसी संदेश को आगे बढ़ाने के लिए यह आयोजन किया जा रहा है।

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    इस कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के शामिल होने की भी योजना है। पार्टी इसे उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से अहम मान रही है। कांग्रेस का मानना है कि दलित समाज के मुद्दों को उठाकर वह प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत कर सकती है। राहुल गांधी के भाषण के जरिए सामाजिक न्याय और समानता का संदेश देने की तैयारी की जा रही है। पार्टी इस कार्यक्रम को बड़े स्तर पर प्रचारित भी कर रही है।

    कांग्रेस का यह कदम सीधे तौर पर बहुजन समाज पार्टी और मायावती की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। लंबे समय से दलित वोटबैंक बसपा का मजबूत आधार रहा है। ऐसे में कांग्रेस की कोशिश है कि वह इस सामाजिक आधार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस दलित समाज के बीच अपनी नई पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। इसी रणनीति के तहत कांशीराम के नाम का सहारा लिया जा रहा है।

    लखनऊ में कार्यक्रम के जरिए दलित समाज को साधने की कांग्रेस की रणनीति

    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। कांग्रेस भी राज्य में संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार नए प्रयास कर रही है। पार्टी का मानना है कि अगर दलित और पिछड़े वर्ग का समर्थन मिलता है तो उसकी स्थिति मजबूत हो सकती है। इसी कारण सामाजिक न्याय के मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है। लखनऊ का यह कार्यक्रम उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    दूसरी ओर बसपा भी कांशीराम की विरासत को अपने राजनीतिक आधार की तरह पेश करती रही है। मायावती अक्सर अपने भाषणों में कांशीराम के विचारों और संघर्षों का उल्लेख करती हैं। ऐसे में कांग्रेस का यह कदम बसपा के लिए राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो सकती है।

    राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दलित वोटबैंक उत्तर प्रदेश की राजनीति में बेहद अहम भूमिका निभाता है। इसी कारण अलग अलग दल इसे अपने पक्ष में करने की कोशिश करते रहते हैं। कांग्रेस भी अब उसी दिशा में सक्रिय नजर आ रही है। लखनऊ में आयोजित होने वाला कार्यक्रम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी आने वाले चुनावों से पहले दलित समाज के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।

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