उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रस्ताव के तहत 2029 के आम चुनाव से लोकसभा सीटों की संख्या 80 से बढ़ाकर 120 और 2032 के विधानसभा चुनाव से सीटें 403 से बढ़ाकर 603 की जा सकती हैं। सीटों के इस विस्तार के साथ प्रतिनिधित्व का दायरा भी बढ़ेगा और नए निर्वाचन क्षेत्रों का गठन संभव है। इन अतिरिक्त सीटों में से एक बड़ी संख्या महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती है, जिससे हर तीसरी सीट पर महिला उम्मीदवार नजर आ सकती हैं और राजनीति में उनकी भागीदारी और मजबूत होगी।
केंद्र सरकार Narendra Modi के नेतृत्व में 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन कानून को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। Amit Shah ने इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के नेताओं से चर्चा की है और जल्द ही सर्वदलीय बैठक बुलाकर सुझाव लिए जा सकते हैं। सरकार सीटों में करीब 50% बढ़ोतरी के साथ 33% महिला आरक्षण लागू करने की योजना पर काम कर रही है, जिसे संविधान के 106वें संशोधन के तहत कानून का रूप दिया गया था, और इसके लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
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लोकसभा सीटें 543 से 816 तक बढ़ाने का प्रस्ताव, 273 महिलाओं के लिए आरक्षित संभव
Amit Shah की बैठक में शामिल नेताओं के मुताबिक केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए नई जनगणना और परिसीमन का इंतजार किए बिना 2011 की जनगणना के आधार पर आगे बढ़ने पर विचार कर रही है। इससे उन राज्यों की चिंताएं भी कम हो सकती हैं, जिन्हें जनसंख्या नियंत्रण के बाद सीटों के नए बंटवारे में नुकसान का डर था। प्रस्ताव के तहत लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 किया जा सकता है, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, साथ ही एससी और एसटी सीटों में भी इसी अनुपात में महिला आरक्षण लागू करने की संभावना जताई गई है।
केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर आम सहमति बनने की स्थिति में 2029 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों की तस्वीर में बड़ा बदलाव आ सकता है। उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 80 से बढ़ाकर 120 की जा सकती है, जिनमें करीब 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जबकि विधानसभा की 403 सीटों को बढ़ाकर 603 किए जाने और उनमें 180 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है। सरकार फिलहाल सहयोगी और विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर राय ले रही है और सहमति बनने पर बजट सत्र या विशेष सत्र बुलाकर कानून में आवश्यक संशोधन के जरिए महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है।
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