₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर लागू किए गए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस शुल्क के खिलाफ एडवोकेट अंजन दत्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर MDR लागू करने का प्रावधान किया गया है। याचिकाकर्ता ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार ने पर्याप्त कानूनी आधार के बिना यह व्यवस्था लागू की है। इस मामले के सामने आने के बाद UPI पेमेंट पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
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₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर MDR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
एडवोकेट अंजन दत्ता ने अपनी याचिका में 14 दिसंबर को जारी अधिसूचना और 15 सितंबर को जारी MDR फ्रेमवर्क को रद्द करने की मांग की है। उनका तर्क है कि सरकार का यह फैसला असंवैधानिक है और मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। याचिका में कहा गया है कि UPI देश में डिजिटल भुगतान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है और इस पर शुल्क लगाने के फैसले का असर व्यापारियों के साथ-साथ ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। याचिकाकर्ता ने अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप करने और संबंधित अधिसूचनाओं की वैधता की जांच करने की मांग की है। अब इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके रुख पर नजर रहेगी।
UPI शुल्क के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार को घेरा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सरकार से UPI पर लगाए गए शुल्क को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए इस फैसले की आलोचना की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शुल्क वापस लेने को कहा। राहुल गांधी ने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी जिक्र किया। विपक्ष का कहना है कि UPI पर शुल्क लागू करने से डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करने वाले लोगों और कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
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राहुल गांधी और कार्ति चिदंबरम ने भी सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम ने भी ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने के प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे ऐसे शुल्क के रूप में बताया, जो भविष्य में व्यापक लेन-देन तक बढ़ सकता है। उनका कहना है कि जिन UPI ट्रांजैक्शन पर पहले कोई शुल्क नहीं लगता था, उनमें ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर MDR लागू करने से धीरे-धीरे शुल्क का दायरा बढ़ने की संभावना पैदा होगी। कार्ति चिदंबरम ने यह भी तर्क दिया कि अगर व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को ग्राहकों से वसूलते हैं, तो इसका असर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
UPI पर MDR को लेकर अब मामला कानूनी और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर चर्चा में आ गया है। एक ओर याचिकाकर्ता सरकार के फैसले की संवैधानिक और कानूनी वैधता पर सवाल उठा रहा है, वहीं विपक्ष इस शुल्क के संभावित आर्थिक प्रभावों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है। दूसरी ओर, इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि अदालत यह तय करेगी कि चुनौती दी गई अधिसूचनाओं और MDR फ्रेमवर्क की कानूनी स्थिति क्या है। फिलहाल UPI उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों की नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी कार्यवाही पर टिकी है।
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