राजधानी दिल्ली की हवा अब सिर्फ असुविधा नहीं बल्कि एक खतरनाक “साइलेंट किलर” के रूप में सामने आ रही है। अलवर में आयोजित एक पर्यावरण संवाद के दौरान विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यहां का वायु प्रदूषण लोगों की जीवन प्रत्याशा पर गंभीर असर डाल रहा है और समय से पहले मौत का कारण बन रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों के महीनों में दिल्ली का प्रदूषण इतना अधिक होता है कि एक व्यक्ति अनजाने में लगभग 9,000 सिगरेट के बराबर धुआं अपने शरीर में ले लेता है। यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए बेहद चिंताजनक है और सीधे तौर पर जीवन पर असर डाल रही है।
चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल वायु प्रदूषण से लाखों लोगों की मौत होती है, जो महामारी से हुई मौतों की तुलना में कहीं अधिक है। वैश्विक स्तर पर भी खराब हवा के कारण हर साल करोड़ों लोग गंभीर बीमारियों और मृत्यु का शिकार हो रहे हैं।
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दिल्ली की जहरीली हवा बनी ‘साइलेंट किलर’, सेहत पर तेज़ी से बढ़ता जानलेवा खतरा
The Lancet की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि प्रदूषित हवा का असर बेहद तेजी से शरीर पर पड़ता है। कुछ ही मिनटों में सांस लेने में दिक्कत शुरू हो सकती है, जबकि लगातार संपर्क हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अचानक कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थितियों का जोखिम बढ़ा देता है।
सबसे चिंताजनक असर बच्चों पर देखा जा रहा है। जहरीले कण फेफड़ों को नुकसान पहुंचाकर शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ाते हैं, जिससे धीरे-धीरे हृदय, मस्तिष्क, किडनी और मेटाबॉलिक सिस्टम भी प्रभावित होते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शहर में होने वाली कुल मौतों का एक बड़ा हिस्सा सूक्ष्म प्रदूषक कणों (PM 2.5) से जुड़ा हुआ है।
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