अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते वैश्विक ईंधन संकट बढ़ रहा है। अब इसका असर एशिया से लेकर यूरोप तक दिख रहा है। कई देशों में पेट्रोल और डीजल महंगे हो गए हैं। खासकर डीजल की कीमतें 81% तक बढ़ी हैं। इसलिए आम लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।
दरअसल, युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। अब ब्रेंट क्रूड 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव भी बढ़ गया है। साथ ही, टैंकरों पर हमलों ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। इसलिए पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ रहे हैं।
खासतौर पर एशियाई देशों में असर ज्यादा दिख रहा है। फिलीपींस में डीजल 81.6% तक महंगा हो गया है। वहीं, मलेशिया और वियतनाम में भी तेजी देखी गई है। इसके अलावा, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया में भी कीमतें बढ़ी हैं। इसलिए आयात पर निर्भर देशों की हालत खराब हो रही है।
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अमेरिका-ईरान युद्ध से वैश्विक ईंधन संकट, डीजल कीमतों में भारी उछाल
दूसरी ओर, विकासशील देशों पर दबाव बढ़ गया है। नाइजीरिया में डीजल 78.3% तक महंगा हुआ है। इसी तरह श्रीलंका में भी कीमतों में उछाल आया है। पहले से कमजोर अर्थव्यवस्थाएं और प्रभावित हुई हैं। इसके कारण महंगाई तेजी से बढ़ रही है।
इतना ही नहीं, अमेरिका और यूरोप भी इससे प्रभावित हैं। अमेरिका में डीजल 41% तक महंगा हुआ है। वहीं, कनाडा में करीब 37% की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन में भी दाम बढ़े हैं। कुल मिलाकर, यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहा है।
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