उत्तर प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट के मामले में पहली बार कड़ी सजा सुनाई गई है। केजीएमयू की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौम्या गुप्ता को खुद को CBI अधिकारी बताकर 85 लाख रुपये की ठगी करने वाले आरोपी देवाशीष को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 7 साल की सजा सुनाई है। यह फैसला साइबर अपराध के खिलाफ न्याय व्यवस्था की सख्ती और डिजिटल ठगी पर पैनी नजर रखने का उदाहरण है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सजा के साथ-साथ आरोपी की संपत्ति जब्त करने के आदेश भी दिए हैं।
यह घटना राजधानी लखनऊ की है, जहां डॉक्टर सौम्या गुप्ता को ऑनलाइन फ्रॉड के जाल में फंसाया गया था। आरोपी ने डिजिटल अरेस्ट की तकनीक का उपयोग कर महिला डॉक्टर को ठगने का प्रयास किया, जिससे लाखों रुपए का नुकसान हुआ। इस मामले में पुलिस और साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को पकड़कर कोर्ट में पेश किया था। इस सजा से यह संदेश जाता है कि डिजिटल अपराधों को बख्शा नहीं जाएगा और न्याय व्यवस्था ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाएगी।
Also Read:Exclusive: भारतीय ऑपरेशन से दहशत में पाकिस्तान, लश्कर का ठिकाना बदलने की कवायद
खुद को CBI अधिकारी बताकर केजीएमयू की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौम्या गुप्ता से 85 लाख रुपये की ठगी करने वाले साइबर अपराधी देवाशीष को कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। यह ऐतिहासिक फैसला स्पेशल सीजेएम कस्टम अमित कुमार ने सुनाया।मामले की जांच साइबर थाना लखनऊ ने की थी, जिसमें इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव ने कोर्ट में ठोस सबूत पेश किए। साइबर क्राइम के इतिहास में यह पहला मामला है जिसमें डिजिटल अरेस्ट के आरोप में 14 महीनों के अंदर कोर्ट ने सजा सुनाई है।
Also Read: डरावनी मगर क्यूट? Labubu Doll के पीछे की वायरल कहानी क्या है?
मामले की पूरी जानकारी पढ़ें:
अभियोजन अधिकारी मषिन्द्र ने जानकारी दी कि 15 अप्रैल 2024 को केजीएमयू में कार्यरत वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौम्या गुप्ता को ड्यूटी के दौरान एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को कस्टम विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा कि वह दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से बात कर रहा है। आरोपी ने दावा किया कि डॉ. गुप्ता के नाम से एक कार्गो बुक किया गया है, जिसमें नकली पासपोर्ट, एटीएम कार्ड और 140 ग्राम एमडीएम बरामद हुआ है।
इसके बाद कॉल को एक अन्य व्यक्ति से जोड़ दिया गया, जिसने खुद को CBI अधिकारी बताकर डॉ. गुप्ता को सात साल की जेल की धमकी दी। डर और दबाव में आकर डॉक्टर ने अपनी निजी जानकारी—बैंक अकाउंट, पैन नंबर और संपत्ति विवरण साझा कर दी। आरोपियों ने डॉ. गुप्ता को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 10 दिन तक मानसिक दबाव में रखा और चार अलग-अलग बैंक खातों में कुल 85 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। जांच में पता चला कि यह ठगी आजमगढ़ के मसौना गांव निवासी देवाशीष ने की थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा और जुर्माने की सजा सुनाई।
Also Read: भारत को अमेरिका से मिल सकती है बड़ी राहत, ट्रेड डील अंतिम दौर में


[…] […]