आज, 6 अक्टूबर 2025 को पूरे भारत में Kojagiri Purnima का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसे शरद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है और यह अत्यंत पावन दिन माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है, जो धन और सौभाग्य प्रदान करती हैं। मान्यता है कि जो साधक सच्चे भाव से व्रत करते हैं, उन्हें देवी की कृपा अवश्य मिलती है। इस पर्व को हिंदू धर्म में बहुत शुभ और फलदायी माना गया है। शरद पूर्णिमा की रात को देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। वे जागरण कर रहे भक्तों को धन, आरोग्य और मानसिक शांति का आशीर्वाद देती हैं। भक्तों को इस दिन व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए।
Also Read : सुप्रीम कोर्ट का नया नियम अब पूरे देश में लागू, आवारा कुत्तों पर बड़ा आदेश
जानिए कोजागिरी व्रत की सही पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
मां लक्ष्मी की कोजागर पूजा निशीथ काल में 6 अक्टूबर को रात 11:45 बजे शुरू होगी। यह पूजा 7 अक्टूबर की रात 12:34 बजे तक चलेगी, जिसकी कुल अवधि 49 मिनट रहेगी। इस दिन चंद्रोदय शाम 5:27 बजे होगा और पूर्णिमा तिथि दोपहर 12:23 बजे से शुरू होगी। भक्तों को सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए और स्वयं को शुद्ध करना चाहिए। इसके बाद देवी लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र के समक्ष धूप, दीप, चंदन, फूल, कौड़ी, कमलगट्टा, पान, सुपारी, सिंघाड़ा, और इलायची चढ़ाएं। 11 शुद्ध घी के दीपक जलाकर लक्ष्मी मंत्र की एक माला जप करें। इसके साथ श्रीसूक्त, लक्ष्मी अष्टकं और लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ भी अवश्य करें। मां को खीर का भोग लगाएं और चंद्रमा की रोशनी में रखें।
शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी 16 कलाओं के साथ आकाश में दिखाई देता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की रोशनी में अमृत तुल्य औषधीय गुण होते हैं। इसलिए परंपरा है कि इस दिन दूध या खीर को चांदनी में रखा जाता है। भक्त मानते हैं कि चंद्रमा की रोशनी से खीर में अमृत तत्व समाहित हो जाते हैं। इसे प्रसाद रूप में सेवन करने से आरोग्य, सौंदर्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस दिन वातावरण शुद्ध होता है और चंद्रमा की किरणें लाभदायक होती हैं। कई आयुर्वेद विशेषज्ञ भी इस दिन खीर खाने की परंपरा को स्वास्थ्यवर्धक बताते हैं। यह पर्व अध्यात्म और विज्ञान का सुंदर संगम माना जाता है।
Also Read : सुप्रीम कोर्ट का नया नियम अब पूरे देश में लागू, आवारा कुत्तों पर बड़ा आदेश
Kojagiri Purnima : श्रद्धा और पुण्य का प्रतीक
कोजागर व्रत की कथा एक साहूकार और उसकी दो बेटियों की कहानी से जुड़ी है। दोनों बहनें पूर्णिमा का उपवास करती थीं, परंतु छोटी बेटी व्रत अधूरा छोड़ देती थी। वह शाम को भोजन कर लेती थी, जिससे उसे पुण्य फल नहीं मिलता था। परिणामस्वरूप उसकी संतानें जन्म के तुरंत बाद मर जाती थीं। परेशान होकर उसने पंडितों से सलाह ली, जिन्होंने व्रत विधिपूर्वक करने की सलाह दी। उसने व्रत पूरी श्रद्धा से किया, जिससे एक पुत्र प्राप्त हुआ जो जल्दी ही मर गया। उसने बेटे को कपड़े से ढक कर बहन को बुलाया। बहन जब पास बैठी तो उसका घाघरा मृत शिशु से छू गया और वह जीवित हो उठा। यह देख बहन ने कहा कि यह तेरे व्रत का नहीं, मेरे पुण्य का फल है।
Kojagiri Purnima व्रत न केवल धार्मिक बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। इस दिन व्रत करने से जीवन में धन, आरोग्य और सुख-शांति बनी रहती है। मां लक्ष्मी की पूजा साधक को स्थिरता, सफलता और आत्मिक बल प्रदान करती है। यह व्रत परिवार की समृद्धि और सद्भाव में वृद्धि करता है। साधक इस दिन जागरण कर मंत्रों और स्तोत्रों का पाठ कर देवी को प्रसन्न करते हैं। पूर्ण श्रद्धा से किया गया यह व्रत सभी संकटों को दूर करने में सक्षम होता है। मां लक्ष्मी की कृपा साधक के जीवन को प्रकाशमय और सौभाग्यशाली बनाती है। चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर का सेवन आरोग्य और सकारात्मकता लाता है। यह पर्व हमारे धार्मिक विश्वास, परंपरा और आस्था को सुदृढ़ करता है।

