देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में जारी छंटनी की प्रक्रिया से कर्मचारियों में भय और असमर्थता का माहौल बन गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने एक कथित “फ्लूइडिटी लिस्ट” तैयार की है, जिसमें उन कर्मचारियों के नाम हैं जिन्हें निकाला जा सकता है। इस सूची में शामिल लोगों को HR द्वारा या तो इस्तीफा देने को कहा जाता है या फिर अचानक नौकरी से निकाल दिया जाता है। खासकर मिड और सीनियर स्तर के कर्मचारियों को बिना किसी चेतावनी के हटाया जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि उन्हें झूठे आरोपों और मानसिक दबाव के जरिए इस्तीफा देने को मजबूर किया गया।
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TCS में छंटनी से कर्मचारियों में डर का माहौल, जबरन इस्तीफों के आरो
एक पूर्व कर्मचारी, जिन्होंने TCS में 13 साल तक काम किया, ने बताया कि उन्हें पाँच महीनों तक HR और RMG द्वारा परेशान किया गया। प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद उन्हें बेंच पर डाल दिया गया और फिर झूठे आरोप लगाए गए कि वे अन्य कंपनियों के लिए काम कर रहे हैं। कंपनी ने उनसे ₹6–8 लाख की रिकवरी मांगी, जिसमें से कुछ रकम उनके ग्रैच्युटी और पेड लीव से काट ली गई। अब वे पुणे में एक दोस्त के घर रह रहे हैं और परिवार को अपनी बेरोजगारी के बारे में नहीं बताया है। अन्य कर्मचारियों ने भी इसी तरह के अनुभव साझा किए, जहाँ बिना पूर्व सूचना के नौकरी से निकाला गया।
कर्मचारियों की आपबीती: मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक दबाव
TCS का कहना है कि यह छंटनी उनकी “फ्यूचर-रेडी” रणनीति का हिस्सा है, जिसमें कंपनी AI, तकनीक और बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार खुद को ढाल रही है। जुलाई में कंपनी ने स्पष्ट किया था कि करीब 2% वैश्विक वर्कफोर्स को इस प्रक्रिया में हटाया जाएगा। हालांकि, आईटी कर्मचारी संघ जैसे FITE और UNITE ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि कर्मचारियों को जबरन इस्तीफा देने पर मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने इसे अपारदर्शी और अनुचित बताया है। कर्मचारियों के मन में अब डर बैठ गया है और वे चुपचाप नौकरी बदलने के रास्ते तलाश रहे हैं।
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